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नैनीताल मां नंदा देवी डोला नगर भ्रमण के साथ महोत्सव का हुआ समापन भक्तों ने नंम आंखों से दी भक्तों ने मां को विदाई 

रिपोर्ट गुड्डू सिंह ठठोला 

नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में बुधवार को ऐतिहासिक श्री नंदा देवी महोत्सव के समापन अवसर पर आस्था, श्रद्धा और कुमाऊं की लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। दोपहर बाद मां नंदा-सुनंदा की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े और पूरी सरोवर नगरी मां नंदा-सुनंदा के जयकारों से गूंज उठी।

19 सितंबर को अष्टमी के दिन से शुरू हुए महोत्सव के अंतिम दिन मां नंदा-सुनंदा को मायके से उनके ससुराल कैलाश के लिए विदा किया गया। दोपहर में देवी भोग के बाद मां नंदा-सुनंदा के डोले को मंदिर की परिक्रमा कराकर बाहर लाया गया। इसके बाद पुष्पवर्षा के बीच डोले को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया।

जयकारों से गूंज उठी सरोवर नगरी

नयना देवी मंदिर से मां नंदा-सुनंदा की शोभायात्रा शुरू होते ही श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। ढोल-नगाड़ों की थाप, मां के जयकारों और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु डोले के साथ चलते नजर आए। स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से नैनीताल पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी मां नंदा-सुनंदा के दर्शन किए।

शोभायात्रा में छोलिया नर्तकों की प्रस्तुतियों ने कुमाऊं की पारंपरिक लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। ढोल-दमाऊं की थाप पर छोलिया नर्तकों के साथ श्रद्धालु भी झूमते और नाचते नजर आए। नगर के विभिन्न वर्गों के लोग बड़ी संख्या में शोभायात्रा में शामिल हुए।

माल रोड से तल्लीताल और फिर मल्लीताल पहुंचा डोला

मां नंदा-सुनंदा का डोला नगर भ्रमण करते हुए माल रोड से तल्लीताल की ओर पहुंचा और इसके बाद वापस मल्लीताल की ओर रवाना हुआ। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और चावल, पुष्प व भेंट अर्पित कर मां को विदाई दी।

मां के डोले के साथ चल रहे श्रद्धालुओं में उत्साह के साथ भावुकता भी दिखाई दी। लोगों ने मां नंदा-सुनंदा को अपनी बेटी के रूप में मानकर उन्हें मायके से कैलाश स्थित ससुराल के लिए विदा किया। कई श्रद्धालु मां की विदाई के दौरान भावुक और नम आंखों में नजर आए।

बेटी की विदाई की तरह भावुक हुआ माहौल

नंदा देवी महोत्सव कुमाऊं की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। मान्यता के अनुसार मां नंदा को पहाड़ की बेटी और आराध्य देवी के रूप में पूजा जाता है। महोत्सव के दौरान मां का मायके आना और फिर विदाई होना लोगों के लिए बेटी के घर आने और ससुराल विदा होने की भावनाओं से जुड़ा है।

श्रद्धालुओं ने मां को चावल और भेंट अर्पित कर उनकी विदाई की। इस दौरान लोगों के चेहरे पर मां के दर्शन की खुशी के साथ विदाई का भावुक क्षण भी साफ नजर आया।

चंद्रवंशी राजाओं की कुलदेवी हैं मां नंदा

मां नंदा को चंद्रवंशी राजाओं की कुलदेवी माना जाता है। कुमाऊं क्षेत्र में मां नंदा की आराधना की विशेष परंपरा रही है। नंदा देवी महोत्सव इसी आस्था और लोक परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। नैनीताल में महोत्सव के दौरान मां नंदा-सुनंदा की पूजा-अर्चना के साथ विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन किए गए।

16 सितंबर को मां नंदा के मायके आगमन के बाद से ही सरोवर नगरी में धार्मिक माहौल बना हुआ था। महोत्सव के अंतिम दिन मां नंदा-सुनंदा की शोभायात्रा के बाद अब उनकी विदाई की रस्म पूरी की जा रही है।

झील में विसर्जन के साथ होगा महोत्सव का समापन

नगर भ्रमण के बाद मां नंदा-सुनंदा के डोले को वापस लाया जाएगा। देर शाम धार्मिक परंपराओं के अनुसार झील में विसर्जन के साथ मां की विदाई पूरी होगी और इसी के साथ इस वर्ष के नंदा देवी महोत्सव का विधिवत समापन हो जाएगा।

इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष सरस्वती खेतवाल और नैनीताल विधायक सरिता आर्य समेत कई जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु मौजूद रहे।

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