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 उत्तराखंड में गर्मी बढ़ते ही  बिजली कटौती बढ़ने लगी है। यूपीसीएल रखरखाव के नाम पर शहर से लेकर गांव तक जमकर बिजली कटौती कर रहा है। इससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

मौजूदा समय में राज्य में बिजली की डिमांड 32.40 मिलियन यूनिट है। इस मांग को पूरा करने के लिए यूजेवीएनएल का अपना बिजली उत्पादन 9.08 मिलियन यूनिट है।

केंद्र समेत अन्य संसाधनों से भी कुल मिलाकर 25.33 मिलियन यूनिट बिजली ही मिल पा रही है। शेष मांग को पूरा करने को 3.28 मिलियन यूनिट बिजली एनर्जी एक्सचेंज से खरीदी जा रही है। इसके साथ ही रियल टाइम मार्केट से अलग से बिजली खरीदी जा रही है।

यूपीसीएल अपनी ओर से दावा कर रहा है कि सभी संसाधनों से बिजली जुटा कर मांग को पूरा किया जा रहा है।

इसके बावजूद शहरों और गांवों में जमकर बिजली कटौती हो रही है। अन्य शहर तो दूर राजधानी देहरादून के शहरी हिस्से तक में घंटों बिजली कटौती हो रही है। शहरों के अलावा ये कटौती ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक हो रही है।

इसके बावजूद यूपीसीएल का तर्क है कि रखरखाव के कारण ही शटडाउन लेना पड़ रहा है। घंटों के इस शटडाउन को यूपीसीएल कटौती मानने को तैयार नहीं है।

जबकि यूपीसीएल की ओर से विद्युत बाधित रहने की सार्वजनिक सूचनाएं प्रतिदिन जारी की जा रही हैं। स्थिति यह है कि प्रदेश में आम उपभोक्ताओं को रोजाना घंटों बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

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