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 भीमताल। ओखलकांडा क्षेत्र के स्योड़ा, कौन्ता, पटरानी, हरीशताल निर्माणाधीन सड़क मोटर मार्ग में हो रहे भ्रष्टाचार की जाँच किए जाने के सम्बंध में तथा स्याली पुल के निर्माणाधीन के दौरान टेढ़ा होने की जाँच किए जाने के संबंध में

 भीमताल विधानसभा क्षेत्र के निर्माणाधीन स्योड़ा, कौन्ता, पटरानी, हरीशताल मोटर मार्ग में मानकों की अंदेखी एवं घोर अनियमितता की जा रही है।

जिसको लेकर ग्रामीणों में ख़ासा आक्रोश देखने को मिल रहा है। उक्त के संबंध में ग्रामीण जन प्रतिनिधियों द्वारा बार बार ज़िले के ज़िम्मेदार अधिकारियों एवं PMGSY काठगोदाम को अवगत कराने के बाद भी हो रही गड़बड़ी पर कोई ध्यान नहीं दिया गया जा रहा है।

जबकि मानकों का खुलेआम उलंघन विभाग द्वारा किया जा रहा है।जबकि विभाग की मिलीभगत होने के कारण स्थानीय स्तर पर पहाड़ काटकर मिट्टी वहीं पर बिछाकर उसके ऊपर से डामर कर दिया जा रहा है।

उक्त सड़क की लंबाई लगभग 37 किलोमीटर है लेकिन उक्त सड़क पर बिलकुल मनमानी तौर से खुलेआम भ्रष्टाचार हो रहा है।

इस संदर्भ में क्षेत्र के तमाम जन प्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों ने समय समय पर उक्त अनियमिताओं के संबंध में PMGSY एवं लोक निर्माण विभाग, भवाली एवं नैनीताल के अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी कोई भी संज्ञान नहीं दिया गया।

उक्त सड़क पर लगायी जाने वाली डामर लगाने के सप्ताह भर बाद उखड़ जा रही है तथा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह इस बात से लगता है कि इसमें कोई मोटा लेन देन अथवा भ्रष्टाचार है।

क्योंकि इतनी अनदेखी आख़िर कोई विभाग क्यों कर रहा है यह सोचनीय विषय है।

उक्त के अतिरिक्त अभी कुछ दिनों पूर्व ही श्याली पुल का निर्माण के दौरान एक तरफ़ से टेढ़ा होकर ज़मीन पर लग जाना इस बात का प्रमाण है कि उक्त पुल में भी बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है।

इसके अतिरिक्त हैड़ाखान सिमलिया सड़क पर भी डामर के दौरान बड़े स्तर पर अनियमितता की जा रही है लेकिन बार बार शिकायत करने के बाद भी उक्त सड़क की भी जाँच नहीं की गई।

इससे प्रतीत होता है कि ज़िम्मेदार अधिकारियों के पास जनता के पैसे का खुल्ले आम भ्रष्टाचार करने का लाइसेंस मिला हुआ है।

वरना अधिकारी क्यों ख़ामोश है। उक्त बातों को लेकर क्षेत्रीय जनता मे भारी आक्रोश पनप रहा है जिसके कारण आज हम ज्ञापन के माध्यम से उक्त आक्रोश को अवगत करा रहे हैं।

अगर 06/05/2024 तक दोषियों के ख़िलाफ़ कठोर कार्यवाही नहीं की गई तो ग्रामीण जनता के साथ उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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