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नैनीताल। धारी तहसील परिसर में आगजनी और माओवादी गतिविधियों से जुड़े मामले में नौ वर्ष बाद न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है।

द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश नैनीताल की अदालत ने अल्मोड़ा निवासी खीम सिंह बोरा और भास्कर पांडे उर्फ भुवन को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है।

अभियोजन के अनुसार एक फरवरी 2017 की रात धारी तहसील परिसर में खड़ी एक सरकारी जिप्सी में आग लगा दी गई थी। इसके साथ ही धारी बाजार, पुरानी शराब भट्टी और ब्लॉक कार्यालय क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े पोस्टर लगाए गए थे और नारे लिखे गए थे। पुलिस ने इस मामले में यूएपीए सहित धारा 436 (आगजनी), लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

घटना के करीब चार वर्ष बाद 18 मई 2021 को मामले में चार्जशीट दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 19 गवाह पेश किए और 17 भौतिक साक्ष्य (माओवादी पोस्टर व झंडे) न्यायालय में प्रस्तुत किए।

न्यायालय ने अपने 15 पन्नों के विस्तृत फैसले में जांच और साक्ष्यों की कई गंभीर कमियों की ओर इशारा किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपियों के विरुद्ध कोई ठोस, विश्वसनीय मौखिक या दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया जा सका। केवल संदेह या पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि वर्षों तक मुकदमे झेलने के बाद निर्दोष साबित हुए लोगों की सामाजिक, मानसिक और आर्थिक क्षति की भरपाई कैसे होगी, यह एक गंभीर सवाल है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने शुरू से ही मामले को साक्ष्य विहीन बताया था, जिस पर न्यायालय ने सहमति जताते हुए दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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