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ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी भीमताल में पंचायती राज अधिकारियों के लिए एआई कार्यशाला शुरू

प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग पर दो दिवसीय प्रशिक्षण

भीमताल। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के भीमताल परिसर में उत्तराखंड सरकार के पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के लिए ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, एआई टूल्स एंड एप्लीकेशंस’ विषय पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में पंचायती राज विभाग से जुड़े 40 अधिकारी एवं प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और विभिन्न एआई आधारित टूल्स के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना है, ताकि दैनिक प्रशासनिक एवं सरकारी कार्यों को अधिक प्रभावी, तेज, सटीक और तकनीक आधारित बनाया जा सके।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी जा रही है, बल्कि हैंड्स-ऑन अभ्यास के माध्यम से एआई टूल्स के वास्तविक उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे अधिकारियों को सरकारी पत्राचार, रिपोर्ट तैयार करने, बैठकों के सारांश, परियोजना प्रस्ताव, कार्यालय आदेश और अन्य प्रशासनिक कार्यों में आधुनिक तकनीक के उपयोग का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है।

शासन और प्रशासन में तेजी से बढ़ रही एआई की भूमिका

भीमताल परिसर के निदेशक ने कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर शासन एवं प्रशासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की लगातार बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ChatGPT और Microsoft Copilot जैसे एआई टूल्स तेजी से पेशेवर कार्यप्रणाली और आधुनिक कार्यालय व्यवस्था का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में एआई साक्षरता एक महत्वपूर्ण कार्यस्थलीय कौशल बन चुकी है। आने वाले समय में सरकारी और प्रशासनिक कार्यों में एआई की भूमिका और अधिक व्यापक होने की संभावना है। ऐसे में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए इन तकनीकों की समझ विकसित करना आवश्यक है।

निदेशक ने कहा कि जनरेटिव एआई का प्रभावी उपयोग केवल किसी एआई टूल को चलाने तक सीमित नहीं है। इसके लिए सही प्रश्न पूछने, स्पष्ट निर्देश देने, सटीक प्रॉम्प्ट तैयार करने और आवश्यक संदर्भ उपलब्ध कराने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतिभागियों को विभिन्न एआई टूल्स का प्रयोग करने और अपने नियमित प्रशासनिक कार्यों में इनके व्यावहारिक उपयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि एआई के उचित और जिम्मेदार उपयोग से कार्यकुशलता, उत्पादकता और निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है।

ग्राफिक एरा के विजन का किया उल्लेख

इस अवसर पर निदेशक ने ग्राफिक एरा के संस्थापक प्रो. (डॉ.) कमल घनशाला के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य केवल क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और अत्याधुनिक तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराना ही नहीं है, बल्कि सरकारी तंत्र को भी आधुनिक तकनीकी ज्ञान से सशक्त बनाना है।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए इस प्रकार की क्षमता निर्माण कार्यशालाएं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशासनिक व्यवस्था को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्रतिभागियों से विश्वविद्यालय की सुविधाओं और सीखने के वातावरण का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान भी किया गया।

प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की बारीकियां सीख रहे अधिकारी

कार्यशाला के आयोजन एवं समन्वय में डॉ. श्याम एस. कपरी, एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट डीन (ट्रेनिंग एंड प्रोजेक्ट्स) के प्रयासों की सराहना की गई। वहीं कार्यशाला के सुचारू संचालन में प्रो. संदीप बुधानी, विभागाध्यक्ष डीसीए, तथा श्री गोविंद जेठी का भी निरंतर सहयोग और समन्वय रहा।

तकनीकी सत्रों की शुरुआत भीमताल परिसर के निदेशक द्वारा रिसोर्स पर्सन के रूप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जनरेटिव एआई और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग विषय पर विस्तृत सत्र से हुई। इसमें प्रतिभागियों को सरकारी एवं प्रशासनिक कार्यों में एआई के व्यावहारिक उपयोग तथा प्रभावी प्रॉम्प्ट तैयार करने की मूलभूत तकनीकों की जानकारी दी गई।

प्रशासनिक कार्यों के लिए प्रभावी प्रॉम्प्ट बनाने की जानकारी

इसके बाद डॉ. हिमांशु पंत ने ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग टेक्नीक्स फॉर एडमिनिस्ट्रेटिव एप्लीकेशंस’ विषय पर सत्र लिया। उन्होंने प्रतिभागियों को इंस्ट्रक्शन-बेस्ड, कॉन्टेक्स्चुअल, रोल-बेस्ड, मल्टी-स्टेप और स्ट्रक्चर्ड प्रॉम्प्ट की जानकारी दी।

सत्र के दौरान प्रॉम्प्ट ऑप्टिमाइजेशन तकनीकों के साथ-साथ एआई से कार्य कराते समय होने वाली सामान्य त्रुटियों और उनसे बचने के तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

ChatGPT से तैयार किए आधिकारिक पत्र और रिपोर्ट

कार्यशाला के एक महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र में प्रो. (डॉ.) भूपेश रावत ने ‘एआई-असिस्टेड ऑफिशियल ड्राफ्टिंग विद ChatGPT’ विषय पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया।

इस दौरान प्रतिभागियों ने ChatGPT की सहायता से आधिकारिक पत्र, सर्कुलर, नोटिस, बैठक सारांश, परियोजना प्रस्ताव, निरीक्षण रिपोर्ट, कार्यालय आदेश और नीति संबंधी नोट तैयार करने का व्यावहारिक अभ्यास किया। अधिकारियों को यह भी बताया गया कि एआई से तैयार सामग्री का उपयोग करते समय तथ्यों की जांच और आवश्यक संपादन करना महत्वपूर्ण है।

Google Gemini से एआई आधारित गवर्नेंस की जानकारी

वहीं प्रो. (डॉ.) अंकुर सिंह बिष्ट ने ‘लेवरेजिंग Google Gemini फॉर एआई-इनेबल्ड गवर्नेंस’ विषय पर सत्र लिया। उन्होंने प्रतिभागियों को दस्तावेज तैयार करने, लंबी रिपोर्टों का सारांश बनाने, बैठक ब्रीफ तैयार करने, डेटा की व्याख्या, अनुवाद और बहुभाषी संचार में एआई के उपयोग की जानकारी दी।

सत्र में Google Workspace के साथ एआई टूल्स के समन्वित उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। साथ ही एआई टूल्स की सीमाओं, गलत या अपूर्ण जानकारी की संभावना और इनके उपयोग के दौरान आवश्यक सावधानियों के बारे में प्रतिभागियों को जागरूक किया गया।

कार्यशाला के पहले दिन प्रतिभागियों को एआई और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की आधारभूत जानकारी के साथ-साथ सरकारी एवं प्रशासनिक कार्यों में इनके व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण मिला। दो दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को आधुनिक तकनीक के बेहतर और जिम्मेदार उपयोग के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

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