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एम्स ऋषिकेश घोटाला: पूर्व निदेशक प्रो. रविकांत सहित बिचौलिया भी सीबीआई चार्जशीट में शामिल

देहरादून। एम्स ऋषिकेश में स्वीपिंग मशीन और मेडिकल स्टोर आवंटन से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. रविकांत और बिचौलिए महेंद्र सिंह उर्फ नन्हे को भी आरोपित बनाया है। सीबीआई ने इस मामले में पूरक आरोपपत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) दाखिल किया है। इससे पहले सितंबर 2025 में मुख्य चार्जशीट दाखिल की जा चुकी थी।

4.41 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा

सीबीआई जांच में सामने आया कि वर्ष 2022 में एम्स ऋषिकेश में रोड स्वीपिंग मशीन की खरीद और केमिस्ट/मेडिकल स्टोर के आवंटन में टेंडर प्रक्रिया की अनदेखी करते हुए करीब 4.41 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया।

यूरेका फोर्ब्स को बाहर कर नियमविहीन कंपनी को मिला टेंडर

स्वीपिंग मशीन के लिए चार कंपनियों ने टेंडर डाले थे, जिनमें प्रतिष्ठित यूरेका फोर्ब्स भी शामिल थी। इसके बावजूद तकनीकी आधार पर यूरेका फोर्ब्स को बाहर कर दिया गया और प्रोमेडिक डिवाइस नामक कंपनी को टेंडर दे दिया गया, जबकि वह निर्धारित शर्तें पूरी नहीं करती थी।

टेंडर की शर्तों में मशीन के तीन माह से अधिक पुरानी न होने का स्पष्ट प्रावधान था, लेकिन एम्स को जो मशीन उपलब्ध कराई गई, वह पहले से इस्तेमाल की जा चुकी थी।

बिचौलिये की भूमिका और पांच लाख की रिश्वत

इस सौदे में मैसर्स नियो मीडिया कंपनी के प्रतिनिधि महेंद्र सिंह उर्फ नन्हे ने बिचौलिये की भूमिका निभाई, जिसके बदले उसे पांच लाख रुपये का भुगतान किया गया। तत्कालीन निदेशक प्रो. रविकांत ने भी टेंडर को मंजूरी देने की संस्तुति की थी।

पहले से आरोपित अधिकारी

इस मामले में सीबीआई पहले ही एम्स के कई अधिकारियों को आरोपित बना चुकी है, जिनमें शामिल हैं—

माइक्रोबायोलॉजी विभाग के तत्कालीन प्रोफेसर बलराम जी ओमर

एनाटॉमी विभाग के तत्कालीन प्रोफेसर बृजेंद्र सिंह

तत्कालीन सहायक प्रोफेसर अनुभा अग्रवाल

प्रशासनिक अधिकारी शशिकांत

लेखाधिकारी दीपक जोशी

इसके अलावा मेडिकल स्टोर आवंटन में त्रिवेणी सेवा फार्मेसी के मालिक को भी आरोपित बनाया गया है।

जांच की पृष्ठभूमि

एम्स ऋषिकेश में मशीनों की खरीद और मेडिकल स्टोर आवंटन में अनियमितताओं की शिकायत पर सीबीआई ने 3 से 7 फरवरी 2022 के बीच छापेमारी की थी।

इसके बाद 22 अप्रैल 2022 को दस्तावेजों की गहन जांच के दौरान इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ।

निचले स्तर से शीर्ष तक जुड़े थे तार

पूरक चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि इस घोटाले की कड़ियां निचले स्तर से लेकर शीर्ष प्रबंधन तक जुड़ी हुई थीं।

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