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हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाएं समाप्त हुए करीब दो माह बीत जाने के बावजूद परीक्षा परिणाम घोषित नहीं होने से छात्र-छात्राओं का आक्रोश बुधवार को हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज में फूट पड़ा।

स्नातक द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर के साथ ही बैक परीक्षाओं के परिणाम लंबे समय से लंबित होने के विरोध में छात्रों ने कॉलेज परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

आंदोलन के दौरान स्थिति उस समय गंभीर हो गई, जब कुछ छात्र पेट्रोल लेकर प्राचार्य कक्ष की छत पर चढ़ गए। छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा परिणाम में लगातार हो रही देरी के कारण उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है और वे आगे की पढ़ाई एवं प्रवेश प्रक्रिया के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।

छत पर चढ़े छात्रों ने खुद पर डाला पेट्रोल

परीक्षा परिणाम घोषित न होने से नाराज छात्र प्राचार्य कक्ष की छत पर पहुंच गए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों में मुकेश पाण्डेय और मेहुल साह ने कथित तौर पर खुद पर पेट्रोल डाल लिया, जिससे कॉलेज परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

स्थिति बिगड़ने पर मुकेश पाण्डेय की तबीयत खराब हो गई और वह बेहोश हो गया। इसके बाद उसे तत्काल छत से नीचे उतारकर उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। वहीं छात्र मेहुल साह की हालत भी बिगड़ने लगी, जिसके बाद उसे भी छत से नीचे उतारकर अस्पताल पहुंचाया गया।

घटना के बाद कॉलेज प्रशासन और पुलिस के सामने छात्रों को सुरक्षित नीचे उतारना बड़ी चुनौती बन गया।

पुलिस ने संभाला मोर्चा, छात्रों से हुई नोकझोंक

हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस बल कॉलेज परिसर पहुंचा। पुलिस ने छत पर चढ़े अन्य छात्र-छात्राओं को नीचे उतारने की कार्रवाई शुरू की। महिला पुलिसकर्मियों ने छत पर मौजूद छात्राओं को भी सुरक्षित नीचे उतारा।

इस दौरान कुछ छात्रों ने छत पर चढ़े विद्यार्थियों को हिरासत में लिए जाने का विरोध किया। इसे लेकर छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच नोकझोंक भी हुई। स्थिति को देखते हुए कॉलेज परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

रिजल्ट की देरी से पीजी प्रवेश पर संकट

एनएसयूआई से जुड़े छात्र मेहुल साह ने कहा कि स्नातक परीक्षा परिणाम घोषित न होने के कारण कई विद्यार्थी स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि पीजी प्रवेश के लिए आवेदन की अंतिम तिथि चार सितंबर घोषित की गई है और कई विषयों में सीटें भी भर चुकी हैं।

छात्रों का आरोप है कि यदि समय रहते परिणाम घोषित नहीं हुए तो बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को पीजी में प्रवेश से वंचित होना पड़ सकता है। वहीं अन्य शिक्षण संस्थानों में भी प्रवेश प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जिससे छात्रों की चिंता और बढ़ गई है।

प्राचार्य और शिक्षकों ने छात्रों को समझाने का किया प्रयास

कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एन.एस. बनकोटी सहित अन्य शिक्षकों ने आंदोलित छात्रों को समझाने और शांत करने का प्रयास किया। हालांकि, परिणाम घोषित होने को लेकर स्पष्ट जानकारी न मिलने से आक्रोशित छात्र शुरुआत में छत से नीचे उतरने के लिए तैयार नहीं हुए।

प्राचार्य प्रो. एन.एस. बनकोटी ने बताया कि कुमाऊं विश्वविद्यालय ने बुधवार सुबह बैक परीक्षाओं का परिणाम घोषित कर दिया है। इसके अलावा विश्वविद्यालय की ओर से स्नातक द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर के परिणाम भी जल्द जारी करने का आश्वासन दिया गया था। इसकी जानकारी आंदोलन कर रहे छात्रों को भी दे दी गई।

हंगामे के बीच विश्वविद्यालय ने जारी किए कई परिणाम

एमबीपीजी कॉलेज में छात्रों के हंगामे के बीच कुमाऊं विश्वविद्यालय की ओर से स्नातक द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम जारी कर दिए गए। इसके साथ ही स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के कुछ विषयों के परिणाम भी घोषित किए गए हैं।

हालांकि, परीक्षा परिणामों में हुई देरी को लेकर छात्रों में लंबे समय से नाराजगी बनी हुई थी। विद्यार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय को परीक्षा परिणाम समयबद्ध तरीके से घोषित करने चाहिए, ताकि आगे की प्रवेश प्रक्रिया, प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

एबीवीपी ने कार्यवाहक कुलपति को सौंपा ज्ञापन

इधर, मामले को लेकर एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने भी विरोध दर्ज कराया। कार्यकर्ताओं ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय पहुंचकर कुमाऊं विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी को ज्ञापन सौंपा और लंबित परीक्षा परिणामों को शीघ्र घोषित करने की मांग की।

छात्र संगठनों का कहना है कि परीक्षा परिणाम में देरी सीधे तौर पर विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से भविष्य में परीक्षा और परिणाम प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने की मांग की है।

एमबीपीजी कॉलेज में हुए इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय की परीक्षा परिणाम व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, बुधवार को कई लंबित परिणाम जारी होने से छात्रों को कुछ राहत मिली है, लेकिन परिणामों में देरी के कारण पीजी प्रवेश और आगे की शैक्षणिक प्रक्रिया प्रभावित होने की चिंता अभी भी बनी हुई है।

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