देहरादून/अल्मोड़ा। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर रौद्र रूप दिखा रहा है। प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 03 सितंबर के लिए नैनीताल और अल्मोड़ा समेत प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी के साथ रेड अलर्ट जारी किया है।
लगातार बारिश, भूस्खलन और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के कई क्षेत्रों में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में जगह-जगह पहाड़ों से मलबा गिरने के कारण सड़कें बंद हो रही हैं, जबकि नदी-नाले उफान पर हैं। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
इन जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली का खतरा
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल, चम्पावत, ऊधम सिंह नगर, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जनपदों में कई स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही तेज गर्जना और आकाशीय बिजली चमकने की भी आशंका जताई गई है।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अल्मोड़ा में स्कूल, कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्र बंद
भारी बारिश और संभावित प्राकृतिक आपदा के खतरे को देखते हुए अल्मोड़ा जिला प्रशासन ने 03 सितंबर को जिले के सभी शासकीय, अशासकीय और निजी विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों और महाविद्यालयों को भी बंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।
जिलाधिकारी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लिया जाएगा। लगातार बारिश के बीच पर्वतीय मार्गों पर भूस्खलन और सड़क बाधित होने की घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय एहतियात के तौर पर लिया गया है।
नैनीताल, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भी हाई अलर्ट
उधर नैनीताल, पिथौरागढ़ और बागेश्वर सहित अन्य संवेदनशील जिलों में अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस, लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग को आपसी समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्यों के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
प्रशासन विशेष रूप से नदी किनारे बसे क्षेत्रों, भूस्खलन संभावित गांवों और संवेदनशील पर्वतीय मार्गों पर नजर बनाए हुए है। लोगों को नदी-नालों के समीप जाने से बचने और मौसम खराब होने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
बारिश से जुड़ी घटनाओं में छह लोगों की मौत
पिछले 24 घंटों के दौरान कुमाऊं मंडल में भारी बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में छह लोगों की दुखद मौत की सूचना ने चिंता बढ़ा दी है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई क्षेत्रों में भूस्खलन, मकानों को नुकसान और सड़क अवरुद्ध होने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शासन और जिला प्रशासन ने संवेदनशील नदी तटों तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को विशेष सावधानी बरतने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
अल्मोड़ा और रानीखेत बेल्ट में सबसे अधिक सतर्कता
अल्मोड़ा जिले में मूसलाधार बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। मौसम विभाग ने अल्मोड़ा के साथ-साथ चौखुटिया, भिकियासैंण, रानीखेत, भनोली, द्वाराहाट और कटारमल समेत आसपास के क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।
बारिश के चलते पहाड़ों से लगातार मलबा गिर रहा है। जिले में 15 सड़कें बंद होने की सूचना है, जिसके कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित हो गया है। सड़कें बंद होने से स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और प्रशासन द्वारा बंद मार्गों को खोलने के लिए मशीनरी तैनात की जा रही है।
कोसी नदी का बढ़ता जलस्तर बढ़ा रहा चिंता
अल्मोड़ा शहर और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण कोसी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से ऊंचाई वाले पर्वतीय मार्गों पर यात्रा न करें। साथ ही नदी-नालों और गधेरों के आसपास जाने से बचने की अपील की गई है।
प्रशासन की अपील—बेवजह यात्रा से बचें
लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आवश्यक होने पर ही यात्रा करें। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा से पहले सड़क की स्थिति और मौसम की जानकारी जरूर लें।
प्रशासन ने लोगों से यह भी कहा है कि किसी भी आपात स्थिति में अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें।
उत्तराखंड में मानसून की इस सक्रियता ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में जनजीवन की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। लगातार बारिश के बीच प्रशासन की नजर संवेदनशील क्षेत्रों पर बनी हुई है और राहत एवं बचाव एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। आने वाले घंटों में बारिश की स्थिति को देखते हुए पर्वतीय जिलों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
नैनीताल और हल्द्वानी: 200 मिमी से ज्यादा बारिश, गौला बैराज से छोड़ा गया पानी
सरोवर नगरी नैनीताल और उसके मैदानी प्रवेश द्वार हल्द्वानी में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं. नैनीताल जिले में पिछले 24 घंटों में 89 मिमी की औसत बारिश हुई, जबकि खुद नैनीताल शहर में 200 मिमी का भारी आंकड़ा पार हो चुका है. विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम और मुक्तेश्वर में भी 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है. पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह थम गई हैं. नैनीताल के गौला बैराज से नदी में 27 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद रातभर निचले इलाकों में हड़कंप की स्थिति रही. हल्द्वानी, रामनगर, भीमताल, भवाली और कोटाबाग के नदी-नाले पूरे वेग से बह रहे हैं. गौला नदी के तेज बहाव के कारण बिंदुखत्ता, लालकुआं और शांतिपुरी में कृषि भूमि का बड़े पैमाने पर कटान हो रहा है.
ऊधम सिंह नगर और मैदानी इलाके: तटवर्ती बस्तियों में अलर्ट, कटान से किसान परेशान
कुमाऊं की पहाड़ियों पर हो रही मूसलाधार बारिश का सीधा असर ऊधम सिंह नगर जिले के मैदानी इलाकों पर पड़ रहा है. जिले से गुजरने वाली गौला, कोसी, दाबका, नंधौर और कैलाश नदियां खतरे के निशान के पास बह रही हैं. लालकुआं और शांतिपुरी के तराई क्षेत्र में खेतों में पानी घुसने से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. प्रशासन की मुनादी गाड़ियां लगातार नदी किनारे बसी बस्तियों में सायरन बजाकर लोगों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की चेतावनी दे रही हैं. राहत और बचाव दल हालात पर नजर रखे हुए हैं ताकि जलस्तर अचानक बढ़ने पर किसी भी तरह की जनहानि को रोका जा सके.
कुमाऊं में 95 मार्ग बंद, बॉर्डर सड़कें भी कटीं… नेशनल हाईवे खुले
पहाड़ों पर बारिश का सबसे बड़ा असर यातायात नेटवर्क पर पड़ा है. कुमाऊं मंडल में भूस्खलन और मलबा आने से कुल 95 सड़कें बंद हैं. रणनीतिक रूप से अहम धारचूला-तवाघाट और तवाघाट-गूंजी बॉर्डर रोड पर भी वाहनों के पहिए थम गए हैं. जिलों के अनुसार:
- नैनीताल: 47 सड़कें बंद (3 स्टेट हाईवे, 3 डिस्ट्रिक्ट रोड, 41 ग्रामीण रास्ते)
- पिथौरागढ़: 21 सड़कें बंद
- अल्मोड़ा: 15 सड़कें बंद
- बागेश्वर: 11 सड़कें बंद
- चम्पावत: 1 सड़क बंद
नैनीताल जिले में खनस्यू-पतलोट, गर्जिया-बेतालघाट-खैरना और काठगोदाम-सिमलियाबैड स्टेट हाईवे भारी मलबे के कारण ठप पड़े हैं. हालांकि इस आफत के बीच राहत की खबर यह है कि सभी प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग चालू हैं. लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई की जेसीबी मशीनों ने हल्द्वानी-अल्मोड़ा हाईवे, हल्द्वानी-नैनीताल हाईवे और टनकपुर-चंपावत-पिथौरागढ़ नेशनल हाईवे से मलबा हटाकर यातायात को सुचारु बनाए रखा है.
देहरादून और विकासनगर: कॉलोनियों में भरा पानी, ताश के पत्तों की तरह गिरे मकान
राजधानी देहरादून और उससे सटे विकासनगर क्षेत्र में पिछले दिनों हुई अतिवृष्टि के जख्म अभी भरे नहीं हैं. तहसील क्षेत्र के कंडोली, बिधोली, प्रेमनगर, शुद्धोवाला, हरबर्टपुर और नवाबगढ़ के कई ग्रामीण इलाकों में भारी तबाही हुई है. कई मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए और रिहायशी कॉलोनियों में पानी भर जाने से गृहस्थी का सारा सामान नष्ट हो गया. मौसम विभाग ने आज भी देहरादून में भारी बारिश और आकाशीय बिजली चमकने का अनुमान जताया है. नगर निगम और जिला प्रशासन जलभराव वाले क्षेत्रों में पंपिंग सेटों के जरिए पानी निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा है.
रुक-रुक कर बरस रहे बादल, IMD का 8 सितंबर तक का पूर्वानुमान
सीमांत जिले चमोली में पिछले 24 घंटों से रुक-रुक कर बारिश जारी है. बुधवार सुबह कुछ देर के लिए धूप निकलने से लोगों ने राहत महसूस की, लेकिन दोपहर बाद फिर बादलों ने डेरा जमा लिया. बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर संवेदनशील स्थानों पर बोल्डर गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है. इस बीच, मौसम विभाग के अनुसार पूरे राज्य में 08 सितंबर तक मानसून सक्रिय रहेगा. 04 सितंबर को नैनीताल, चम्पावत, देहरादून, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में भारी वर्षा की संभावना है. वहीं 05 और 06 सितंबर को देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, बागेश्वर और चमोली में तीव्र बौछारें पड़ने का अनुमान है.










