नैनीताल श्री राम सेवक सभा 107 सालों से जीवंत है नैनीताल की रामलीला परंपरा 

107 वर्षों की परंपरा को जीवंत बनाए हुए है श्री राम सेवक सभा, पर्दे के पीछे के कलाकारों का भी अहम योगदान

 रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला 

नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल की ऐतिहासिक रामलीला अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, शानदार अभिनय और जीवंत मंचन के लिए जानी जाती है। श्री राम सेवक सभा नैनीताल वर्ष 1918 से लगातार रामलीला का मंचन करती आ रही है। 107 वर्षों की इस गौरवशाली परंपरा में अनेक कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। रामलीला की इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने में जहां मंच पर अभिनय करने वाले कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान है, वहीं पर्दे के पीछे रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाने वाले लोग भी इसकी सफलता के अहम सूत्रधार हैं।

रामलीला के दौरान कलाकारों को उनके पात्रों के अनुरूप रूप देने से लेकर मंच की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने तक कई लोग पूरी निष्ठा से जुटे रहते हैं। इन कलाकारों और सहयोगियों की मेहनत का ही परिणाम है कि नैनीताल की यह ऐतिहासिक रामलीला हर वर्ष दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

47 वर्षों से कलाकारों का मेकअप कर रहे भीम सिंह कार्की

श्री राम सेवक सभा की रामलीला में भीम सिंह कार्की का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। वह वर्ष 1979 से लगातार रामलीला के कलाकारों का मेकअप करते आ रहे हैं। करीब 47 वर्षों के अनुभव के साथ उन्होंने विभिन्न पात्रों को उनके किरदार के अनुरूप रूप देने की कला में विशेष पहचान बनाई है।

भीम सिंह कार्की कलाकारों के चेहरे पर उनके पात्रों के अनुरूप रंग-सज्जा कर उन्हें मंच पर उतरने के लिए तैयार करते हैं। उनके मेकअप से कलाकारों के किरदार अधिक प्रभावशाली दिखाई देते हैं और रामलीला के दृश्यों में जीवंतता आती है। मेकअप की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ वह स्वयं भी रामलीला में केवट जैसे महत्वपूर्ण पात्र का अभिनय करते हैं। इस तरह वह पर्दे के पीछे और मंच पर, दोनों ही भूमिकाओं में रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।

तीन दशक से अधिक समय से रावण की भूमिका निभा रहे कैलाश जोशी

रामलीला में रावण का किरदार अपनी प्रभावशाली आवाज, संवाद अदायगी और दमदार व्यक्तित्व के कारण विशेष महत्व रखता है। श्री राम सेवक सभा की रामलीला में कैलाश जोशी तीन दशक से अधिक समय से रावण की भूमिका निभाते आ रहे हैं। अपने अभिनय के माध्यम से वह इस पात्र को प्रभावशाली बनाने का प्रयास करते हैं और दर्शकों को रामलीला के प्रसंगों से जोड़ते हैं।

पिछले 14 वर्षों से वह लगातार इस भूमिका को निभा रहे हैं। कुंभकरण के पाठ को लेकर उनका विशेष लगाव है और उन्हें इस पात्र का अभिनय करने में आनंद आता है। मंच पर उनकी दमदार आवाज, संवादों की प्रस्तुति और अभिनय शैली दर्शकों का ध्यान आकर्षित करती है। कुंभकरण के रूप में मंच पर उनकी उपस्थिति रामलीला के दृश्यों को और अधिक रोचक बनाती है।

कलाकारों की मेहनत से जीवंत होती है रामलीला की परंपरा

श्री राम सेवक सभा की ऐतिहासिक रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नैनीताल की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां कलाकार वर्षों तक एक ही पात्र को निभाकर अपनी कला को निखारते हैं, जबकि मेकअप करने वाले और व्यवस्थाओं से जुड़े लोग आयोजन को सफल बनाने के लिए निरंतर मेहनत करते हैं।

भीम सिंह कार्की के 47 वर्षों के अनुभव, कैलाश जोशी के तीन दशक से अधिक समय के अभिनय और रक्षित शाह के 14 वर्षों से कुंभकरण के पाठ जैसी भूमिकाएं इस परंपरा की निरंतरता को दर्शाती हैं। कलाकारों की प्रभावशाली आवाज, संवाद अदायगी, वेशभूषा और रूप-सज्जा मिलकर रामलीला के पात्रों को जीवंत बनाती हैं।

107 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में ऐसे कलाकारों और सहयोगियों का समर्पण ही इसकी असली ताकत है। उनकी मेहनत से नैनीताल की ऐतिहासिक रामलीला आज भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही है और आने वाली पीढ़ियों तक अपनी सांस्कृतिक विरासत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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