ओलावृष्टि और भारी बारिश से बर्बाद हुई फसलों की भरपाई करेगी सरकार, कृषि-बागवानी और गन्ना किसानों को मिलेगा अतिरिक्त मुआवजा; KCC ऋण चुकाने के लिए केंद्र से मांगी जाएगी तीन महीने की मोहलत
देहरादून। उत्तराखंड में हाल ही में हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान के बाद राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किसानों को आर्थिक संकट से उबारने और उन्हें अगली फसल की तैयारी के लिए राहत देने के उद्देश्य से अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। सरकार की इस पहल के तहत कृषि, बागवानी और गन्ने की फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को आपदा राहत नियमों के तहत मिलने वाली सहायता के बराबर अतिरिक्त आर्थिक मदद देने का फैसला किया गया है।
इसके अलावा, किसानों को तत्काल आर्थिक राहत पहुंचाने के लिए अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक के बिजली बिलों के भुगतान को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के ऋण की अदायगी के लिए केंद्र सरकार से तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत देने का अनुरोध किया जाएगा। सरकार के इन फैसलों से प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे किसानों को आर्थिक दबाव से राहत मिलने की उम्मीद है।
फसल नुकसान पर मिलेगी अतिरिक्त आर्थिक सहायता
प्रदेश में अक्टूबर महीने के दौरान हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। कई क्षेत्रों में खेतों में खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। खासकर कृषि, बागवानी और गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत आपदा राहत के निर्धारित मानकों के अनुसार मिलने वाली सहायता के बराबर अतिरिक्त धनराशि दिए जाने की व्यवस्था की गई है।
सरकार का उद्देश्य है कि प्राकृतिक आपदा के कारण आर्थिक संकट में फंसे किसानों को जल्द राहत मिले और वे आगामी कृषि कार्यों को जारी रख सकें। हालांकि, प्रत्येक किसान को मिलने वाली वास्तविक सहायता का निर्धारण फसल नुकसान के आकलन और निर्धारित पात्रता के आधार पर किया जाएगा।
अक्टूबर से दिसंबर तक बिजली बिलों के भुगतान पर राहत
बारिश और ओलावृष्टि से फसलें खराब होने के बाद किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। खेती में पहले ही निवेश कर चुके किसानों के लिए नुकसान की भरपाई करना और घरेलू खर्चों के साथ कृषि संबंधी देनदारियों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में राज्य सरकार ने अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 के बिजली बिलों के भुगतान को फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया है। इससे प्रभावित किसानों को तत्काल बिल जमा करने के दबाव से राहत मिलेगी और वे उपलब्ध धनराशि का इस्तेमाल अपनी जरूरतों तथा अगली फसल की तैयारी में कर सकेंगे।
हालांकि, बिजली बिलों का भुगतान स्थगित किया गया है, उन्हें पूरी तरह माफ करने की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में किसानों को इस अवधि के बिलों के भुगतान के संबंध में सरकार की आगे की व्यवस्था और दिशा-निर्देशों का इंतजार करना होगा।
किसान क्रेडिट कार्ड के ऋण पर भी राहत की तैयारी
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण की अदायगी के मुद्दे पर भी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से किसानों को ऋण चुकाने के लिए तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत देने का अनुरोध करने का निर्णय लिया है।
इस पहल का उद्देश्य उन किसानों को राहत देना है, जिनकी फसलें बर्बाद होने के कारण आमदनी प्रभावित हुई है और जिनके सामने समय पर ऋण चुकाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
यदि केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में मंजूरी मिलती है, तो पात्र किसानों को ऋण अदायगी के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा। इससे किसानों पर तत्काल वित्तीय दबाव कम करने और अगली फसल की तैयारी के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
9 अक्टूबर की बारिश और ओलावृष्टि से हुआ था भारी नुकसान
गौरतलब है कि 9 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के कई हिस्सों में तेज बारिश, तूफान और ओलावृष्टि के कारण जनजीवन के साथ कृषि गतिविधियां भी प्रभावित हुई थीं। ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर सहित कई क्षेत्रों में किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई थीं।
किसानों के लिए यह नुकसान इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि फसल तैयार करने में उन्होंने पहले ही बीज, खाद, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों पर धन खर्च किया था। फसल खराब होने से उनकी आमदनी प्रभावित हुई है, जबकि कृषि कार्यों से जुड़ी आर्थिक जिम्मेदारियां उनके सामने बनी हुई हैं।
हालात का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और स्थलीय निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और नुकसान की स्थिति की जानकारी ली थी।
नुकसान का आकलन कर जल्द तैयार होगी प्रभावित किसानों की सूची
मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बारिश और ओलावृष्टि से हुए फसल नुकसान का आकलन तेजी से किया जाए। प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान की वास्तविक स्थिति का पता लगाकर पात्र किसानों की सूची तैयार करने और राहत पहुंचाने की प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया गया है।
सरकार की कोशिश है कि नुकसान के आकलन और आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद पात्र किसानों तक सहायता राशि जल्द पहुंचाई जा सके। इसके लिए संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों को राहत देने पर सरकार का जोर
उत्तराखंड में मौसम की मार से प्रभावित किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता, बिजली बिलों के भुगतान को स्थगित करने और KCC ऋण अदायगी के लिए मोहलत मांगने जैसे फैसले महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
इन कदमों से किसानों को तत्काल आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, राहत का वास्तविक लाभ नुकसान के आकलन, पात्रता और संबंधित फैसलों के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत देने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। अब किसानों की निगाहें नुकसान के आकलन, सहायता राशि के वितरण और ऋण अदायगी में प्रस्तावित राहत पर टिकी हैं।

