ब्रेकिंग न्यूज़
नंदा देवी महोत्सव के समापन पर 23 सितंबर को नैनीताल जिले के इन क्षेत्रों में स्कूल-कॉलेज रहेग बंद, आंगनबाड़ी केंद्रों में भी अवकाशफर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र से मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराने का मामला, अभ्यर्थी के पिता समेत एजुकेशन कंसल्टेंसी संचालक गिरफ्तारश्री नन्दा देवी महोत्सव की पंचारती में उमड़ा आस्था का सैलाब, कुलपति, आईजी और केएमवीएन एमडी ने की मां नंदा-सुनंदा की आरतीयूओयू ने बढ़ाई जुलाई 2026 सत्र की प्रवेश तिथि, अब इस तारीख तक कर सकेंगे ऑनलाइन दाखिलानैनीताल नंदा देवी महोत्सव में मुख्यमंत्री ने मां नयना देवी के किए दर्शन, प्रदेश की खुशहाली की कामना

देहरादून। उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में कथित फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के आधार पर दाखिला दिलाने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक अभ्यर्थी का पिता और दूसरा एजुकेशन कंसल्टेंसी संचालक शामिल है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराकर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने की कोशिश की।

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रूपेश पंडित (30), निवासी मेरठ, उत्तर प्रदेश और अरविंद कुमार, निवासी लक्सर, हरिद्वार के रूप में हुई है। अरविंद कुमार मामले में शामिल एक अभ्यर्थी के पिता बताए गए हैं।

13 सितंबर को दर्ज हुए थे मुकदमे

एसएसपी के अनुसार, अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा ‘अपनी सरकार’ पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के लिए कथित कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन किए जाने का मामला सामने आया था। इस संबंध में 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेंटाउन थानों में मुकदमे दर्ज किए गए।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जया बलोनी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी ने मामले में शामिल बताए जा रहे अभ्यर्थियों के दस्तावेजों को कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू की।

जांच में अभ्यर्थियों के पते भी निकले गलत

पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि सभी आरोपी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते संदिग्ध थे और जांच में गलत पाए गए। इसके बाद एसआईटी ने संबंधित शिक्षण संस्थानों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की और अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी जुटाई।

जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को पूछताछ के लिए रायपुर थाने बुलाया। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

पांच साल से एजुकेशन कंसल्टेंसी चला रहा था रूपेश

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी रूपेश पंडित पिछले करीब पांच वर्षों से अपने साथियों के साथ एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था। वह मेरठ में ‘मिकोडो पाठशाला’ नाम से कंपनी संचालित करता था।

पुलिस का कहना है कि इस कंपनी के माध्यम से देश के विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों के साथ-साथ विदेशों में भी विद्यार्थियों को अलग-अलग पाठ्यक्रमों में दाखिला दिलाने का काम किया जाता था। इनमें एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम जैसे पाठ्यक्रम शामिल बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार, दाखिले के बदले कमीशन लिया जाता था।

तीन बच्चों के दाखिले के लिए हुआ था संपर्क

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि अरविंद कुमार ने अपनी बेटी परी और दो अन्य परिचितों के बच्चों के दाखिले के लिए रूपेश पंडित से संपर्क किया था। आरोप है कि तीनों अभ्यर्थियों के दाखिले के लिए प्रत्येक का सौदा 45 लाख रुपये में तय किया गया था।

पुलिस के अनुसार, प्रत्येक दाखिले के लिए 20 लाख रुपये अग्रिम के रूप में दिए गए थे, जबकि शेष रकम एमबीबीएस में दाखिला होने और कक्षाएं शुरू होने के बाद देने की बात तय हुई थी।

फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, सौदा तय होने के बाद रूपेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों अभ्यर्थियों के लिए कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए और उनके आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाए।

एसआईटी अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, दस्तावेज तैयार करने वाले व्यक्तियों और दाखिला प्रक्रिया में कथित रूप से शामिल अन्य कड़ियों की भी जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने और उनके आधार पर प्रवेश की कोशिश में कितने लोग शामिल हैं तथा इस तरह के अन्य मामलों में भी यही तरीका अपनाया गया था या नहीं।

जांच का दायरा बढ़ने के संकेत

मामले में दो गिरफ्तारियों के बाद अब पुलिस की जांच उन अन्य लोगों तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिनके नाम दस्तावेजों और पूछताछ में सामने आ सकते हैं। एसआईटी संबंधित रिकॉर्ड, आवेदन पत्र, प्रमाणपत्र और शिक्षण संस्थानों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Advertisement
यह भी पढ़ें :  यूकेएसएसएससी ने वन विकास निगम में स्केलर के पदों पर निकाली भर्ती, इस तारीख से शुरू होंगे ऑनलाइन आवेदन

You missed

❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.