हल्द्वानी। रानीबाग स्थित प्रसिद्ध चित्रशिला धाम में शनि मंदिर को लेकर चल रहा विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पहाड़ी आर्मी के संस्थापक हरीश रावत ने शनिवार को प्रेस वार्ता कर मंदिर परिसर और उससे जुड़ी भूमि को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने दावा किया कि मंदिर की भूमि पर नियमों को ताक पर रखकर अतिक्रमण किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने मंदिर परिसर में कुछ कथित अनैतिक गतिविधियां संचालित होने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रेस वार्ता के दौरान हरीश रावत ने कहा कि चित्रशिला धाम स्थित शनि मंदिर की जमीन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज उनके पास हैं। इन दस्तावेजों को उन्होंने कुमाऊं मंडल के आयुक्त और नैनीताल जिलाधिकारी को उपलब्ध कराया है। उनका कहना है कि दस्तावेजों के आधार पर मंदिर की भूमि और मौके की वास्तविक स्थिति की जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर परिसर से जुड़ी भूमि पर निर्धारित नियमों और प्रावधानों की अनदेखी करते हुए अतिक्रमण किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने मौके पर कुछ ऐसी गतिविधियां संचालित होने का भी आरोप लगाया, जिनकी प्रशासनिक स्तर पर जांच आवश्यक है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
हरीश रावत ने प्रशासन से मांग की कि चित्रशिला धाम और शनि मंदिर से संबंधित भूमि के दस्तावेजों की जांच कर मौके की स्थिति का सत्यापन कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो उसे नियमानुसार तत्काल हटाया जाना चाहिए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दस्तावेज सौंपते हुए पूरे मामले में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक स्थल से जुड़ा मामला होने के कारण प्रशासन को तथ्यों की गंभीरता से जांच करनी चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके और किसी भी प्रकार के विवाद को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
चित्रशिला धाम स्थित शनि मंदिर को लेकर इससे पहले भी सवाल उठते रहे हैं। मंदिर प्रबंधन और भूमि से जुड़े आरोपों को लेकर विवाद सामने आने के बाद अब पहाड़ी आर्मी की ओर से एक बार फिर प्रशासन के समक्ष दस्तावेज और शिकायत रखे जाने से मामला चर्चा में आ गया है।
फिलहाल, शनि मंदिर की भूमि पर अतिक्रमण और कथित अनैतिक गतिविधियों को लेकर लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। प्रशासन की ओर से मामले की जांच या आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कुमाऊं आयुक्त और नैनीताल जिला प्रशासन इन दस्तावेजों के आधार पर क्या कार्रवाई करता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।





