चारधाम यात्रा में हेलीकॉप्टर सेवाएं ठप होने का खतरा, दो पायलट अनिवार्य करने के आदेश का विरोध
DGCA के नए नियम से नाराज हेलीकॉप्टर ऑपरेटर, आज से चारधाम सेवाएं बंद करने की चेतावनी
देहरादून। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा पर हेलीकॉप्टर सेवाओं को लेकर संकट गहराने लगा है। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के दो पायलट अनिवार्य करने संबंधी नए निर्देश के विरोध में चारधाम मार्ग पर सेवाएं दे रहे हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने सोमवार से अपनी सेवाएं स्थगित करने की चेतावनी दी है। ऑपरेटरों के इस फैसले से चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यदि प्रशासन और ऑपरेटरों के बीच सहमति नहीं बनी, तो चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर से श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह ठप होने की आशंका है।
हाल ही में बदरीनाथ से देहरादून लौटते समय जोशीमठ के पास एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस दर्दनाक हादसे में पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई थी। दुर्घटना के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे। इसके बाद DGCA ने चारधाम मार्ग पर हेलीकॉप्टर संचालन के लिए सुरक्षा मानकों को और सख्त करते हुए नए निर्देश जारी किए।
दो पायलट अनिवार्य करने का निर्देश
DGCA के नए आदेश के अनुसार, सोमवार से चारधाम मार्ग पर उड़ान भरने वाले सभी हेलीकॉप्टरों में दो पायलटों की तैनाती अनिवार्य होगी। इसके साथ ही सह-पायलट के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरने का अनुभव और निर्धारित योग्यता होना जरूरी किया गया है।
निर्देशों में प्रत्येक उड़ान से पहले देहरादून स्थित सहस्रधारा कंट्रोल रूम से रूट क्लीयरेंस लेना भी अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा प्रत्येक लैंडिंग के बाद क्रू को पायलट रिपोर्ट (PIREP) दर्ज करानी होगी। DGCA का उद्देश्य इन उपायों के माध्यम से चारधाम मार्ग पर हेलीकॉप्टर संचालन को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है।
11 ऑपरेटरों ने संयुक्त पत्र भेजकर जताया विरोध
DGCA के नए निर्देशों के खिलाफ चारधाम मार्ग पर सेवाएं दे रहे 13 में से 11 हेलीकॉप्टर ऑपरेटर एकजुट हो गए हैं। ऑपरेटरों ने DGCA प्रमुख वीर विक्रम यादव, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) को संयुक्त पत्र भेजकर आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
ऑपरेटरों के मुताबिक चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं की दरें निर्धारित होती हैं और इस कारोबार में मुनाफे की गुंजाइश पहले से ही सीमित है। ऐसे में अतिरिक्त खर्च का बोझ उठाना या इसे पूरी तरह यात्रियों पर डालना संभव नहीं होगा।
पहाड़ी क्षेत्रों में योग्य सह-पायलटों की कमी
हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने के लिए योग्य सह-पायलटों की उपलब्धता को भी बड़ी चुनौती बताया है। उनका कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान का अनुभव रखने वाले और निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले सह-पायलटों की तत्काल व्यवस्था करना आसान नहीं है।
ऑपरेटरों ने यह भी सवाल उठाया है कि उड़ान मार्गों पर ड्रोन और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियों से पैदा होने वाले बाहरी खतरों पर सख्ती से नियंत्रण करने के बजाय अचानक उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
बातचीत से समाधान नहीं निकला तो ठप हो सकती हैं सेवाएं
ऑपरेटरों ने अपने संयुक्त पत्र में स्पष्ट किया है कि जब तक DGCA के निर्देशों की समीक्षा नहीं की जाती और उनसे बातचीत कर कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक वे चारधाम चार्टर सेवाएं स्थगित रखेंगे।
यदि प्रशासन और ऑपरेटरों के बीच बातचीत से सहमति नहीं बनती है, तो चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर सेवाओं से वंचित होना पड़ सकता है। इससे विशेष रूप से उन यात्रियों को परेशानी होगी, जो कम समय में यात्रा पूरी करने या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से हेलीकॉप्टर सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
फिलहाल सभी की नजरें DGCA और उत्तराखंड प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। सुरक्षा मानकों को लेकर जारी इस विवाद का समाधान नहीं निकलने पर चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर संचालन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

