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हल्द्वानी। भारत जैसे युवा-बहुल राष्ट्र में राष्ट्रीय युवा दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, प्रेरणा और राष्ट्रीय दिशा का प्रतीक है।

हर वर्ष 12 जनवरी को मनाया जाने वाला यह दिवस महान विचारक स्वामी विवेकानंद की जयंती से जुड़ा है, जिनके विचार आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक हैं। वर्ष 2026 की थीम—“उठो, जागो और अपनी शक्ति को पहचानो”—डिजिटल युग की चुनौतियों और अवसरों के बीच युवा भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करती है।

स्वामी विवेकानंद ने औपनिवेशिक काल में भारतीय युवाओं को आत्मबल, चरित्र-निर्माण और सेवा-भाव का संदेश दिया। उनका विश्वास था कि राष्ट्र का उत्थान युवाओं की चेतना, अनुशासन और नैतिक साहस पर निर्भर करता है।

इसी वैचारिक विरासत के सम्मान में भारत सरकार ने 1984 में 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया। तब से यह दिवस शिक्षा-संस्थानों, सामाजिक संगठनों और नीति-विमर्श के माध्यम से युवाओं को राष्ट्र-निर्माण से जोड़ने का सतत मंच बना हुआ है।

आज का समय डिजिटल परिवर्तन का है। शिक्षा, रोजगार और नागरिक सहभागिता के स्वरूप तेज़ी से बदले हैं। ऑनलाइन शिक्षण, स्टार्ट-अप संस्कृति, डेटा-आधारित निर्णय और वैश्विक नेटवर्किंग ने युवाओं के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा किए हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने ज्ञान तक पहुँच को अधिक लोकतांत्रिक बनाया है और प्रतिभा को सीमाओं से परे पहचान दिलाई है। परंतु इस प्रगति के साथ चुनौतियाँ भी सामने आई हैं—सूचनात्मक अव्यवस्था, साइबर जोखिम, आभासी दुनिया का मानसिक दबाव और मूल्य-बोध का क्षरण।

ऐसे में 2026 की थीम युवाओं से आग्रह करती है कि तकनीक को साधन बनाएँ, साध्य नहीं; और नवाचार के साथ नैतिकता का संतुलन साधें।

समकालीन परिदृश्य में शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रमाण-पत्र तक सीमित नहीं रह सकता। कौशल-संपन्नता, आलोचनात्मक चिंतन, शोध-संवेदनशीलता और अंतर्विषयी दृष्टि आज की आवश्यकता हैं। डिजिटल माध्यमों ने सीखने के अवसर बढ़ाए हैं, पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अकादमिक गहराई की जिम्मेदारी और भी बढ़ी है। 2026 की थीम युवाओं को समस्या-आधारित समाधान, स्थानीय नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होने का संकेत देती है—जहाँ उद्यमशीलता सामाजिक सरोकारों से जुड़ती है।

लोकतंत्र की सुदृढ़ता भी युवाओं की सार्थक भागीदारी पर निर्भर करती है। मतदान से आगे बढ़कर नीति-संवाद, सामाजिक लेखा-जोखा, सामुदायिक सेवा और डिजिटल नागरिकता—ये सभी आधुनिक युवा नेतृत्व के आयाम हैं। थीम का निहितार्थ स्पष्ट है: युवा केवल दर्शक न रहें, बल्कि नीति-निर्माण और सामाजिक परिवर्तन के सह-निर्माता बनें। सक्रिय नागरिकता ही लोकतांत्रिक संस्थाओं को जीवंत रखती है।

डिजिटल युग ने महिलाओं, युवाओं और वंचित समूहों के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं—ऑनलाइन उद्यम, वित्तीय समावेशन और लचीले कार्य-मॉडल इसके उदाहरण हैं। फिर भी, संरचनात्मक असमानताएँ और सुरक्षा-चिंताएँ बनी हुई हैं। राष्ट्रीय युवा दिवस 2026 समावेशी विकास पर बल देता है, जहाँ अवसर, संसाधन और प्रतिनिधित्व समान रूप से उपलब्ध हों। समावेशन केवल नीति का लक्ष्य नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

जलवायु संकट के दौर में युवाओं की भूमिका और अधिक निर्णायक हो जाती है। हरित प्रौद्योगिकी, सतत नवाचार और सामुदायिक संरक्षण में युवा नेतृत्व भविष्य की कुंजी है। डिजिटल उपकरण पर्यावरणीय डेटा, पारदर्शिता और जन-जागरूकता को सशक्त कर सकते हैं—बशर्ते नीति और व्यवहार में सततता को प्राथमिकता दी जाए।।

अंततः, राष्ट्रीय युवा दिवस 2026 आत्ममंथन का आह्वान करता है—क्या तकनीकी प्रगति मानवीय मूल्यों के साथ चल रही है? क्या शिक्षा समाजोन्मुख बन रही है? क्या नेतृत्व समावेशी और उत्तरदायी है? “उठो, जागो और अपनी शक्ति को पहचानो” केवल प्रेरक नारा नहीं, बल्कि नीति-संकेत है। जब युवा अकादमिक गहराई, डिजिटल विवेक और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ेंगे, तब भारत का विकास न केवल तीव्र होगा, बल्कि न्यायपूर्ण और टिकाऊ भी बनेगा।

ऋतंबरा नैनवाल

सहायक प्राध्‍यापक, लोक प्रशासनउ

त्‍तराखण्‍ड मुक्‍त विश्‍वविद्यालय, हल्‍द्वानी, नैनीताल

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