आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग से आसान होंगे सरकारी कामकाज, आधिकारिक दस्तावेज तैयार करने से लेकर बेहतर निर्णय लेने तक की दी जाएगी जानकारी

भीमताल। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल परिसर में उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल), उत्तराखंड सरकार के 30 कर्मचारियों के लिए ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, एआई टूल्स एवं एप्लीकेशंस’ विषय पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और आधुनिक एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी देकर सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक सरल, प्रभावी और समयबद्ध बनाना है।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में रवि कुमार राजोरा, अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण मंडल (ईडीसी), हल्द्वानी उपस्थित रहे। उनके साथ भवाली के उपखंड अधिकारी विद्या भूषण जोशी सहित यूपीसीएल के अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

इस अवसर पर भीमताल परिसर के निदेशक ने विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) कमल घनशाला के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य कुमाऊं क्षेत्र के लोगों तक गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और आधुनिक ज्ञान के अवसर पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान समय में कार्यों को अधिक स्मार्ट, सरल और प्रभावी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

मुख्य अतिथि रवि कुमार राजोरा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में विभिन्न क्षेत्रों की कार्यप्रणाली को बदलने और कार्यक्षमता बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं। सरकारी विभागों में एआई का सही इस्तेमाल समय की बचत करने के साथ-साथ काम की गुणवत्ता और उत्पादकता में भी सुधार ला सकता है।

उन्होंने प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एआई से बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए उसे स्पष्ट और प्रभावी निर्देश देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एआई का सर्वोत्तम उपयोग तभी संभव है, जब तकनीकी क्षमता के साथ मानवीय बुद्धिमत्ता, विवेक और आलोचनात्मक सोच का भी समुचित इस्तेमाल किया जाए।

कार्यशाला के पहले तकनीकी सत्र में भीमताल परिसर के निदेशक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जनरेटिव एआई और सरकारी प्रशासन में इनके व्यावहारिक उपयोगों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रभावी प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के माध्यम से नियमित प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाया जा सकता है।

एआई आधारित उपकरणों की मदद से विभिन्न सूचनाओं को व्यवस्थित करने, दस्तावेजों का प्रारूप तैयार करने और समय लेने वाले कार्यों को अधिक कुशलता से पूरा करने में सहायता मिल सकती है। इससे कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में समय की बचत करने के अवसर मिलते हैं।

उन्होंने तकनीक के जिम्मेदार उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि एआई से प्राप्त जानकारी का मूल्यांकन करना और उसके इस्तेमाल के दौरान मानवीय विवेक तथा आलोचनात्मक सोच को बनाए रखना आवश्यक है।

चैटजीपीटी से तैयार किए जा सकेंगे आधिकारिक दस्तावेजों के प्रारूप

प्रो. (डॉ.) नवीन तिवारी ने ‘चैटजीपीटी की सहायता से आधिकारिक दस्तावेज तैयार करना’ विषय पर व्यावहारिक सत्र आयोजित किया। उन्होंने प्रभावी प्रॉम्प्ट तैयार करने की तकनीकों का प्रदर्शन करते हुए बताया कि चैटजीपीटी की सहायता से आधिकारिक पत्र, परिपत्र, नोटिस, बैठक की कार्यवाही, रिपोर्ट और नीतिगत टिप्पणियों के प्रारूप तैयार किए जा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि सही निर्देश देने और एआई टूल्स का व्यवस्थित इस्तेमाल करने से दस्तावेज तैयार करने में लगने वाला समय कम किया जा सकता है। इससे प्रशासनिक दस्तावेजों की गुणवत्ता और कार्यकुशलता में सुधार लाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, आधिकारिक उपयोग से पहले तैयार दस्तावेजों की तथ्यात्मक सटीकता और आवश्यक विवरणों की जांच करना भी महत्वपूर्ण है।

प्रभावी प्रॉम्प्ट लिखने की तकनीकें सिखाईं

गोविंद सिंह जेठी ने ‘प्रशासनिक कार्यों के लिए प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की तकनीकें’ विषय पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। उन्होंने प्रभावी प्रॉम्प्ट तैयार करने, उन्हें जरूरत के अनुसार बेहतर बनाने और प्रॉम्प्ट लिखते समय होने वाली सामान्य गलतियों से बचने के तरीकों की जानकारी दी।

उन्होंने चैटजीपीटी के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों को अधिक सटीक, सरल और समयबद्ध बनाने के व्यावहारिक तरीके भी समझाए। सत्र का उद्देश्य कर्मचारियों को इस योग्य बनाना था कि वे अपनी कार्य संबंधी जरूरतों के अनुसार एआई टूल्स को स्पष्ट निर्देश देकर उपयोगी परिणाम प्राप्त कर सकें।

कार्यशाला के पहले दिन एआई और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की बुनियादी अवधारणाओं के साथ-साथ सरकारी प्रशासन में इनके उपयोगों पर विस्तार से चर्चा की गई। वहीं, दूसरे दिन शासन और प्रशासन में एआई के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर केंद्रित हैंड्स-ऑन सत्र आयोजित किए जाएंगे।

इन सत्रों में प्रतिभागियों को सीखी गई तकनीकों का वास्तविक कार्यों में इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा। कार्यशाला में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि कर्मचारी एआई टूल्स को केवल तकनीकी जानकारी तक सीमित न रखें, बल्कि उनका उपयोग अपने दैनिक कार्यों की गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाने के लिए भी करें।

कार्यशाला के आयोजन और समन्वय में महत्वपूर्ण योगदान के लिए डॉ. श्याम एस. कापड़ी, प्रो. (डॉ.) संदीप कुमार बुधानी और गोविंद सिंह जेठी के प्रयासों की सराहना की गई।

यह दो दिवसीय कार्यशाला सरकारी कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकी कौशल से सशक्त बनाने, डिजिटल नवाचार को प्रोत्साहित करने और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से यूपीसीएल के कर्मचारियों को बदलते तकनीकी परिवेश के अनुरूप अपनी कार्यक्षमता विकसित करने और एआई आधारित समाधानों का जिम्मेदारी से उपयोग करने की जानकारी मिल रही है।

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