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वनहोली 2024।  भांग का इस्तेमाल सिर्फ नशे के लिए ही नहीं बल्कि कई अन्य चीजों में भी किया जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि भांग वार्निश उद्योग की जीवनधारा है।

भांग का उपयोग साबुन के निर्माण में भी किया जाता है, विशेषकर साबुन को नरम बनाने के लिए। भांग में कई औषधीय गुण भी होते हैं।

भांग से बनती है औषधियां

भांग का पौधा 4 से 10 फीट तक लंबा हो सकता है। यह मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे गंगा के मैदानी इलाकों में पाया जाता है। भांग को तेलुगु में गंजाई, तमिल में गांजा और कन्नड़ में बंगी कहा जाता है। यह पौधा बंजर भूमि पर भी आसानी से उग जाता है। भांग के पौधे से 3 चीजें बनती हैं। फाइबर, तेल और औषधियां।

पशुओं में होने वाली कई बीमारियों का इलाज किया जाता है

गांजे की राख का उपयोग पशुओं में होने वाली कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है। आईसीएआर के अनुसार, भांग की राख जानवरों में हेमेटोमा रोग (जिसमें रक्त के थक्के बनते हैं) के इलाज में प्रभावी है।

इसे उनकी त्वचा पर लगाया जाता है। यह उपचार उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय है। आईसीएआर के मुताबिक, कभी-कभी मवेशी कांपने लगते हैं, खासकर दुधारू मवेशी। इसमें भी भांग फायदेमंद है।

रस्सियां बनाने में किया जाता है उपयोग

भांग की खेती हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के छोटा/बड़ा भंगाल और मंडी जिले के करसोग में की जाती है। पकने के बाद कटी हुई फसल को सूखने के लिए अलग रख दिया जाता है। सूखने के बाद रेशों को अलग कर लिया जाता है। इसका उपयोग रस्सियां बनाने में किया जाता है।

जलन और दर्द से राहत

आईसीएआर के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के सोलकी क्षेत्र में किसान भांग के पौधों का उपयोग धान की नर्सरी में थ्रेडवर्म को नियंत्रित करने के लिए करते हैं। भांग का उपयोग मधुमक्खी के डंक के उपचार में भी किया जाता है। इसकी पत्तियों को गर्म करके पीसकर पेस्ट बनाया जाता है।

फिर इसे मधुमक्खी के काटने वाली जगह पर लगाया जाता है। यह जलन और दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है। यह हिमाचल प्रदेश में बहुत लोकप्रिय है।

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