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नई दिल्ली। महात्मा हंसराज मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर, हंसराज कॉलेज एवं गार्गी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘रीसेंट ट्रेंड्स इन बायोलॉजी’ रिफ्रेशर कोर्स के अंतर्गत “औषधीय पौधों की विविधता एवं स्थिति” विषय पर एक विशेष विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया।

व्याख्यान के मुख्य वक्ता कुमाऊँ विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर नैनीताल के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं विजिटिंग डायरेक्टरेट के निदेशक प्रो. ललित तिवारी रहे।

अपने संबोधन में प्रो. तिवारी ने औषधीय पौधों को “ग्रीन गोल्ड” बताते हुए उनकी जैव विविधता, पारिस्थितिक महत्व तथा मानव जीवन में उनकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने औषधीय वनस्पतियों के वैज्ञानिक वर्गीकरण को सरल भाषा में समझाते हुए विभिन्न महत्वपूर्ण प्रजातियों एवं उनके पारंपरिक तथा आधुनिक चिकित्सीय उपयोगों की जानकारी दी।

उन्होंने संकटग्रस्त एवं लुप्तप्राय औषधीय पौधों की प्रजातियों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय को समय की मांग बताया। व्याख्यान में आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले ‘अष्टवर्ग पौधों’ की अवधारणा पर भी विस्तृत चर्चा की गई, जिसे प्रतिभागियों ने विशेष रुचि के साथ सुना।

प्रो. तिवारी ने औषधीय पौधों की वैश्विक स्थिति, बढ़ती मांग, बदलते उपयोग पैटर्न तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रवृत्तियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत औषधीय एवं सुगंधित पौधों के क्षेत्र में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है और लगभग 130 देशों को इनकी आपूर्ति करता है। साथ ही भारतीय हर्बल बाजार की बढ़ती संभावनाओं और बढ़ती मांग के कारण औषधीय पौधों पर पड़ रहे दबाव को भी रेखांकित किया।

व्याख्यान के दौरान औषधीय पौधों के क्षरण के प्रमुख कारणों, उनके संरक्षण की प्रभावी रणनीतियों तथा सतत प्रबंधन के लिए आवश्यक कार्ययोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को औषधीय पौधों के महत्व, संरक्षण आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं के प्रति जागरूक करना था।

सत्र के अंत में प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका प्रो. तिवारी ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। संवादात्मक चर्चा ने कार्यक्रम को और अधिक ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बना दिया।

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