नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच जारी विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज कर दी हैं।
वर्ष 2027 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों को लेकर आयोग ने प्रशासनिक तैयारियों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
चुनाव आयोग की प्रस्तावित योजना के अनुसार, नवंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में अधिकारियों की टीमें उत्तर प्रदेश का दौरा कर सकती हैं। इन टीमों के दौरे के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों के नेतृत्व में आयोग की टीम भी चुनावी तैयारियों का जायजा लेने पहुंचेगी। इस दौरान संबंधित राज्यों में चुनावी व्यवस्थाओं, प्रशासनिक तैयारियों और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की जाएगी।
15 दिसंबर तक पूरा हो सकता है चुनाव आयोग का दौरा
आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए निर्वाचन आयोग की तैयारियां चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव आयोग का दौरा 15 दिसंबर तक पूरा होने की संभावना है। इसके बाद चुनाव की तारीखों की घोषणा किसी भी समय की जा सकती है।
हालांकि, चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा निर्वाचन आयोग की ओर से ही की जाएगी। फिलहाल चुनाव की तारीखों को लेकर अंतिम निर्णय का इंतजार है।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनावों की घोषणा 8 जनवरी को की गई थी। ऐसे में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों के साथ-साथ प्रशासनिक मशीनरी ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
EVM की फर्स्ट लेवल चेकिंग शुरू, तकनीकी जांच पर जोर
विधानसभा चुनावों की तैयारियों के तहत निर्वाचन आयोग ने पांचों राज्यों में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम की प्रथम स्तरीय जांच (फर्स्ट लेवल चेकिंग यानी FLC) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य चुनाव में इस्तेमाल की जाने वाली मशीनों की तकनीकी स्थिति की जांच करना और यह सुनिश्चित करना है कि वे मतदान के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
ईवीएम की जांच जिला निर्वाचन अधिकारी की निगरानी में की जाती है। इस दौरान मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी उपस्थित रहने का अवसर दिया जाता है। मशीनों की तकनीकी जांच भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) के अधिकृत इंजीनियरों की ओर से की जाती है।
जांच शुरू होने से पहले राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को इसकी सूचना दी जाती है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके।
राजनीतिक दलों की मौजूदगी में खोला जाता है वेयरहाउस
ईवीएम की जांच के लिए निर्धारित वेयरहाउस को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोला जाता है। इसके बाद अधिकृत इंजीनियरों की टीम को पहचान पत्रों की जांच के बाद अंदर प्रवेश दिया जाता है।
पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। वेयरहाउस और जांच प्रक्रिया की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि प्रत्येक गतिविधि का रिकॉर्ड रखा जा सके।
निर्वाचन आयोग की इस प्रक्रिया का उद्देश्य मशीनों की स्थिति की जांच के साथ ही चुनावी तैयारियों में पारदर्शिता बनाए रखना है।
कंट्रोल यूनिट से VVPAT तक की बारीकी से जांच
फर्स्ट लेवल चेकिंग के दौरान इंजीनियर ईवीएम के प्रत्येक प्रमुख हिस्से की तकनीकी जांच करते हैं। इसमें कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) शामिल हैं।
जांच के दौरान यह देखा जाता है कि मशीनों के सभी उपकरण सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं। इसके साथ ही मशीनों की साफ-सफाई और आवश्यक रखरखाव भी किया जाता है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, पुरानी बैटरियों को बदलकर नई मूल बैटरियां लगाई जाती हैं।
इसके बाद मशीनों की कार्यक्षमता की जांच के लिए मॉक पोल कराया जाता है। इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहते हैं। मॉक पोल के जरिए यह परखा जाता है कि मशीन में दर्ज किए गए मतों और उनके परिणामों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समानता है या नहीं।
जांच में सही पाई गई मशीनों को किया जाता है अलग
तकनीकी जांच और मॉक पोल में सही पाई जाने वाली मशीनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत चिह्नित किया जाता है। ऐसी मशीनों पर ग्रीन स्लिप लगाई जाती है और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में उन्हें सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है।
वहीं, जांच के दौरान किसी मशीन में तकनीकी खराबी पाए जाने पर उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अलग रखा जाता है, ताकि चुनाव में केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप मशीनों का ही इस्तेमाल किया जा सके।
उत्तराखंड में भी चुनावी तैयारियों पर रहेगी नजर
उत्तराखंड में वर्ष 2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग की तैयारियां महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। आने वाले समय में आयोग की टीम राज्य में चुनावी व्यवस्थाओं, प्रशासनिक तैयारियों, मतदान केंद्रों और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर सकती है।
फिलहाल ईवीएम की जांच और अधिकारियों के प्रस्तावित दौरों के साथ चुनावी तैयारियों का सिलसिला आगे बढ़ रहा है। अब सभी की नजरें चुनाव आयोग के अगले कदम और आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा पर टिकी हैं।
नोट: 15 दिसंबर के बाद चुनाव की घोषणा होने की बात प्रस्तावित कार्यक्रम पर आधारित संभावना है। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा से पहले इसे चुनाव की निश्चित तारीख नहीं माना जाना चाहिए।

