अमेरिका-कनाडा के नागरिकों को बनाते थे निशाना, एंटीवायरस के नाम पर 100 डॉलर के गिफ्ट कार्ड मांगते थे आरोपी; 14 मोबाइल, चार लैपटॉप और तीन वाहन बरामद
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में किराये के फ्लैट से कथित तौर पर फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर विदेशी नागरिकों के साथ ठगी करने का मामला सामने आया है। राजपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने देर रात छापेमारी कर इस कथित फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया और पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी गूगल वॉइस ऐप के माध्यम से अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को फोन करते थे। उन्हें मोबाइल फोन या लैपटॉप में खराबी होने का झांसा देकर एंटीवायरस उपलब्ध कराने के नाम पर 100 डॉलर मूल्य के गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए कहा जाता था। इसके बाद गिफ्ट कार्ड का नंबर या फोटो हासिल कर उसे दूसरे लोगों को कम कीमत पर बेच दिया जाता था।
पुलिस ने मौके से 14 मोबाइल फोन, चार लैपटॉप, एक आईपैड और तीन वाहन समेत अन्य उपकरण बरामद किए हैं। बरामद तीनों वाहनों को सीज कर दिया गया है। मामले में पांचों आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने आगे की जांच शुरू कर दी है।
आधी रात को पुलिस ने मारा छापा
पुलिस के अनुसार, राजपुर थाना क्षेत्र के तरला नागल रोड स्थित आर्चिड पार्क के एक फ्लैट में अवैध रूप से कॉल सेंटर संचालित किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने 12 और 13 अक्टूबर की मध्यरात्रि फ्लैट पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान मौके से पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान आशीष नागर, अक्षत शर्मा, अंशु मुद्गल, राज सिंह और अभिनव सिंह के रूप में हुई है। इनमें से तीन आरोपित मेरठ और दो सुलतानपुर के निवासी बताए गए हैं। पुलिस अब आरोपितों से पूछताछ कर उनके नेटवर्क, ठगी के तरीके और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
नोएडा के कॉल सेंटर में काम करने के बाद शुरू किया अपना नेटवर्क
पुलिस की पूछताछ में मुख्य आरोपित आशीष नागर ने बताया कि वह पहले नोएडा स्थित एक कॉल सेंटर में काम करता था। वहां विदेशी नागरिकों को फोन कर इसी तरह ठगी किए जाने की बात सामने आई है। करीब तीन महीने पहले नौकरी छोड़ने के बाद वह देहरादून आ गया और राजपुर क्षेत्र में किराये पर फ्लैट लेकर अपने साथियों के साथ कथित तौर पर फर्जी कॉल सेंटर संचालित करने लगा।
पुलिस के मुताबिक, आरोपितों ने इस काम के लिए विदेशी नागरिकों के करीब पांच हजार मोबाइल नंबर खरीदे थे। इन नंबरों के माध्यम से वे संभावित ग्राहकों से संपर्क करते थे और उन्हें तकनीकी समस्या का हवाला देकर अपने झांसे में लेने की कोशिश करते थे।
तकनीकी खराबी का झांसा देकर मांगते थे 100 डॉलर के गिफ्ट कार्ड
पुलिस के अनुसार, आरोपित गूगल वॉइस ऐप की मदद से विदेशी नागरिकों को फोन करते थे। कॉल के दौरान वे संबंधित व्यक्ति के मोबाइल फोन या लैपटॉप में खराबी होने की बात कहते थे। इसके बाद समस्या ठीक करने और एंटीवायरस ऐप उपलब्ध कराने के नाम पर ग्राहकों को गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए कहा जाता था।
आरोपित प्रत्येक ग्राहक से 100 डॉलर मूल्य का गिफ्ट कार्ड खरीदकर उसका नंबर या फोटो भेजने को कहते थे। इस तरीके से वे ग्राहकों से पैसे हासिल करते थे। हालांकि, पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि गिफ्ट कार्ड मिलने के बाद आरोपित सभी ग्राहकों को एंटीवायरस ऐप उपलब्ध नहीं कराते थे।
गिफ्ट कार्ड कम कीमत पर बेचकर कमाते थे पैसा
पुलिस के मुताबिक, आरोपित ग्राहकों से हासिल किए गए गिफ्ट कार्ड को दूसरे लोगों को कम कीमत पर बेच देते थे। इस तरह वे तकनीकी सहायता और एंटीवायरस उपलब्ध कराने का झांसा देकर कथित तौर पर ठगी कर रहे थे।
पूछताछ के दौरान आरोपितों ने बताया कि उनके निशाने पर मुख्य रूप से अमेरिका और कनाडा के नागरिक थे। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित नेटवर्क के जरिए कितने लोगों को निशाना बनाया गया और ठगी से कितनी रकम हासिल की गई।
पुलिस से बचने के लिए बदलते थे ठिकाना
पुलिस के अनुसार, आरोपित एक स्थान पर कुछ समय तक कॉल सेंटर संचालित करने के बाद अपना ठिकाना बदल देते थे। ऐसा इसलिए किया जाता था, ताकि उनकी गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो और वे लंबे समय तक पुलिस की नजरों से बच सकें।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 14 मोबाइल फोन, चार लैपटॉप, एक आईपैड और तीन वाहन समेत अन्य उपकरण बरामद किए। पुलिस बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है, जिससे कथित ठगी से जुड़े मोबाइल नंबरों, संपर्कों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जानकारी मिल सके।
भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमा दर्ज
पुलिस ने पांचों आरोपितों के खिलाफ राजपुर थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। बरामद तीनों वाहनों को सीज कर दिया गया है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित कॉल सेंटर से कितने समय से गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, विदेशों में कितने लोगों से संपर्क किया गया और इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के बाद मामले में और खुलासे होने की संभावना है।

Advertisement
यह भी पढ़ें :  नैनीताल पुलिस की नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 65.40 लाख की स्मैक के साथ दो तस्कर गिरफ्तार

You missed

❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.