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हल्द्वानी। बहुचर्चित रेलवे बनाम बनभूलपुरा भूमि प्रकरण में आज Supreme Court of India में अहम सुनवाई हुई। तीन बार तारीख टलने के बाद 24 फरवरी को कोर्ट रूम नंबर-1 में 36वें नंबर के केस के रूप में मामले पर सुनवाई हुई, जिस पर पूरे शहर की निगाहें टिकी रहीं।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने व्यावहारिक और मानवीय समाधान की दिशा में अहम निर्देश जारी किए। अदालत ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और राजस्व अधिकारियों को आदेश दिया कि वे बनभूलपुरा क्षेत्र में विशेष शिविर लगाकर वहां रह रहे लोगों की सहायता करें, ताकि पात्र परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास के लिए आवेदन कर सकें।

पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को रेलवे भूमि पर बने रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, लेकिन सरकार का यह दायित्व है कि पात्र लोगों का पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने कहा कि यह गतिरोध अनिश्चितकाल तक नहीं चल सकता और 31 मार्च से पहले ठोस समाधान सामने आना चाहिए।

कोर्ट के प्रमुख निर्देश:

आवास योजना ही विकल्प: प्रभावित अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन करना होगा।

19 मार्च से विशेष शिविर: बनभूलपुरा में ऑन-साइट कैंप लगाकर आवेदन प्रक्रिया आसान की जाएगी।

प्रशासन को सीधी हिदायत: नैनीताल जिला प्रशासन और हल्द्वानी के अधिकारी आवेदन पत्र उपलब्ध कराएं और पूरी प्रक्रिया में सहयोग करें।

काउंसलिंग व जागरूकता: सामाजिक कार्यकर्ता और विशेषज्ञ लोगों को योजना के लाभ समझाकर भ्रम और आशंकाएं दूर करेंगे।

न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की कि भूमि राज्य की है और उसका उपयोग राज्य का विशेषाधिकार है, यह मामला कानूनी अधिकार से अधिक मानवीय सहायता से जुड़ा हुआ है। इस प्रकरण में अब अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

सुनवाई के मद्देनज़र बनभूलपुरा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मनोज कुमार कत्याल के नेतृत्व में फ्लैग मार्च निकाला गया, जबकि डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने स्वयं मौके का निरीक्षण कर लोगों से शांति बनाए रखने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।

रेलवे स्टेशन हल्द्वानी, इंद्रानगर, मुजाहिद चौक, ताज मस्जिद, गांधी नगर सहित अन्य संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि अदालत के संभावित फैसले का सम्मान किया जाए, अफवाहों से बचा जाए और सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट साझा न की जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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