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भीमताल। ओखलकांडा क्षेत्र स्थित पीएचसी खनस्यू में 23 फरवरी 2026 को आयोजित दिव्यांग शिविर के दौरान विवाद खड़ा हो गया।

शिविर में मेडिकल बोर्ड की टीम, जिसमें बेस चिकित्सालय हल्द्वानी के चिकित्सक शामिल थे, ने स्थानीय विधायक राम सिंह कैड़ा पर अभद्र व्यवहार और अनुचित दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

चिकित्सकों द्वारा जारी पत्र के अनुसार, शिविर में उपस्थित विधायक ने दिव्यांग प्रमाण पत्रों में दिव्यांगता प्रतिशत बढ़ाने तथा ऐसे व्यक्तियों के भी प्रमाण पत्र बनाने के लिए दबाव डाला जो निर्धारित श्रेणी में नहीं आते।

डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने भारत सरकार की निर्धारित गाइडलाइन के आधार पर ही प्रमाण पत्र जारी करने की बात कही, जिस पर विधायक ने नाराजगी जताई।

आरोप है कि विधायक ने शिविर को बंद कराने और चिकित्सकों को कमरे में बंद करने तक की बात कही।

कथित दुर्व्यवहार से आहत अस्थि रोग विशेषज्ञ शिविर बीच में ही छोड़कर चले गए। इसके बाद भी शेष चिकित्सकों पर प्रमाण पत्र जारी करने का दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है।

चिकित्सकों ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में खनस्यू और पटलोट क्षेत्र में आयोजित शिविरों के दौरान भी इसी प्रकार का दबाव बनाया गया था। उनका कहना है कि दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कई चिकित्सकीय जांचें आवश्यक होती हैं, जो भीड़भाड़ या खुले स्थान पर संभव नहीं हैं। ऐसे मामलों में मरीजों को अस्पताल बुलाना जरूरी होता है, लेकिन इस प्रक्रिया को स्वीकार नहीं किया गया।

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए चिकित्सकीय दल ने अपनी सुरक्षा और गरिमा की रक्षा के मद्देनज़र विधायक के क्षेत्र में दिव्यांग शिविरों के लिए अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की घोषणा की है।

इस मामले की सूचना आयुक्त दिव्यांगजन उत्तराखंड, कुमाऊं कमिश्नर, जिलाधिकारी नैनीताल, निदेशक कुमाऊं मंडल नैनीताल और अध्यक्ष पीएमएचएस को भी भेजी गई है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण में क्या रुख अपनाता है और चिकित्सकों की सुरक्षा व निष्पक्ष कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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