देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साझा किए स्वास्थ्य एवं मानव कल्याण के गुर, कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा- खेल आज एक बेहतरीन प्रोफेशन
नैनीताल। कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल में स्वस्थ जीवनशैली, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, योग, प्राणायाम, खेल पोषण और तनाव प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। 30 एवं 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस संगोष्ठी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभाग करते हुए स्वस्थ जीवनशैली एवं मानव कल्याण के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। संगोष्ठी का उद्देश्य पारंपरिक भारतीय योग पद्धतियों और आधुनिक खेल विज्ञान के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ ही स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अकादमिक शोध को प्रोत्साहित करना है।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत के प्रो. पुष्पेश पांडेय, विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री रीतेश साह, डीएसबी परिसर के निदेशक प्रो. संजय पंत, डॉ. रुचि साह एवं आयोजक सचिव डॉ. संतोष कुमार सहित अनेक गणमान्य शिक्षाविद उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र में डॉ. रुचि साह ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं शोधार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच बनाए रखना बेहद जरूरी है। योग, खेल एवं वैज्ञानिक जीवनशैली को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को अधिक स्वस्थ और बेहतर बना सकता है।
प्रो. पुष्पेश पांडेय ने अपने संबोधन में ऐसे आयोजनों की शैक्षणिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध, नवाचार और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती हैं। वहीं, स्वर्णिम गुजरात स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के प्रो. जतिन सोनी ने खेल शिक्षा, शारीरिक सक्रियता और स्वास्थ्य संवर्धन के क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
सऊदी अरब से जुड़े डॉ. तोमर ने अपने संबोधन में कहा कि खेल और योग के बिना जीवन अधूरा है। बेहतर एवं संतुलित जीवन के लिए खेल, योग और मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शारीरिक सक्रियता और मानसिक शांति के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि वर्तमान समय में खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि एक बेहतरीन प्रोफेशन के रूप में भी उभर रहे हैं। खेल, योग एवं मेडिटेशन के माध्यम से संपूर्ण विश्व के मानव समाज का कल्याण किया जा सकता है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए ज्ञानवर्धक बताते हुए स्वस्थ समाज के निर्माण में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

