उत्तराखंड में पैरेंट्स ने की फीस एक्ट की मांग, एसटीए ने थोपा तीन गुना ज्यादा स्कूल बस किराया
हल्द्वानी। निजी विद्यालयों की मनमानी फीस के बाद अब स्कूल बस और वैन किराए को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अभिभावकों का आरोप है कि सरकार की ओर से स्पष्ट फीस गाइडलाइन न होने का फायदा उठाकर प्राइवेट स्कूल लगातार आर्थिक बोझ बढ़ा रहे हैं।
🔹 फीस नियंत्रण नहीं, अभिभावकों पर बढ़ता बोझ
प्रदेश में लंबे समय से फीस रेगुलेशन एक्ट लागू करने की मांग उठ रही है। डॉ. धन सिंह रावत ने पिछले वर्ष इस दिशा में पहल का आश्वासन भी दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस नीति सामने नहीं आई है।
ऐसे में अभिभावक उम्मीद लगाए बैठे थे, मगर इसके उलट अब स्कूल परिवहन शुल्क ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।
🔹 एसटीए के आदेश से बढ़ा विवाद
राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) द्वारा हाल ही में स्कूली वाहनों के किराए की नई दरें जारी की गई हैं।
इन दरों को पिछले वर्षों की तुलना में दो गुना तक बढ़ा हुआ बताया जा रहा है
अभिभावकों का कहना है कि इससे निजी स्कूलों को अप्रत्यक्ष फायदा मिल रहा है
🔹 “लूट का लाइसेंस” बताया गया फैसला
परिवर्तन कामनी छात्र संघ के महासचिव महेश ने इस फैसले को “लूट का लाइसेंस” करार दिया है।
उनका कहना है:
शिक्षा आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही है
किराया सामान्यतः प्रति किमी तय होता है, लेकिन अब 2200 से 3700 रुपये तक निर्धारित करना अनुचित है
🔹 अभिभावकों की प्रमुख मांगें
एसटीए द्वारा जारी नई किराया दरों को तत्काल वापस लिया जाए
प्रदेश में जल्द से जल्द फीस एक्ट लागू किया जाए
निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्त नियंत्रण किया जाए
🔹 बढ़ता जनदबाव
हल्द्वानी समेत प्रदेशभर में इस मुद्दे पर नाराजगी बढ़ती जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि
“पहले फीस बढ़ी, अब बस किराया—आखिर आम आदमी बच्चों को पढ़ाए तो कैसे?”
साफ है कि फीस नियंत्रण कानून के अभाव में निजी स्कूलों और परिवहन शुल्क को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है, और अब सरकार पर ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।

