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नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में शिक्षक दिवस के अवसर पर एएन सिंह सभागार में गरिमापूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, विश्वविद्यालय कुलगीत तथा संगीत विभाग की ओर से डॉ. रवि जोशी और डॉ. संध्या के निर्देशन में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई।

समारोह की शुरुआत नौसेना एनसीसी कैडेट्स द्वारा कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने के साथ हुई। परिसर निदेशक प्रो. संजय पंत ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत किया।

शिक्षक केवल अध्यापक नहीं, विद्यार्थियों के मार्गदर्शक भी : प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट

इस अवसर पर कुमाऊं विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति एवं विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र प्रो. (कर्नल) सतपाल सिंह बिष्ट ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन में उच्चतम स्तर तक पहुंचने के लिए प्रेरित और मार्गदर्शित करना भी है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक की सबसे बड़ी इच्छा यही होती है कि उसके विद्यार्थी जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल करें और विश्वविद्यालय तथा समाज का नाम रोशन करें। वर्तमान समय में शिक्षक की भूमिका में व्यापक बदलाव आया है। शिक्षक को अब केवल अध्यापक के रूप में नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और फैसिलिटेटर के रूप में भी अपनी भूमिका निभानी होगी।

प्रो. बिष्ट ने कहा कि विद्यार्थियों के साथ व्यक्तिगत संवाद स्थापित करना, उनके मन और भावनाओं को समझना तथा शिक्षक और विद्यार्थी के बीच की दूरी को कम करना आज की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनावश्यक तनाव से बचने की अपील करते हुए कहा कि जीवन में केवल अंक ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि चरित्र, संतुलन और प्रसन्नता भी उतनी ही आवश्यक है।

उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में छोटी-छोटी चीजों को भी बेहतर ढंग से करने का प्रयास करने का संदेश देते हुए “स्मॉल इज ब्यूटीफुल” का मंत्र दिया। साथ ही कहा कि विद्यार्थियों के लिए अध्ययन सदैव प्राथमिकता रहना चाहिए।

नवाचार, शोध और उद्यमिता पर जोर

कुमाऊं विश्वविद्यालय एवं उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने शिक्षक दिवस पर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण और कार्यप्रणाली में नवाचार को अपनाना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में नवाचार, शोध और उद्यमिता शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। तकनीक और सूचना के तेजी से विस्तार ने विद्यार्थियों के सामने वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने के अनेक अवसर खोल दिए हैं। ऐसे में संसाधनों या जानकारी का अभाव अब सफलता की राह में बड़ी बाधा नहीं माना जा सकता।

कुलपति ने कहा कि भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद कुमाऊं क्षेत्र के विद्यार्थी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। जब शिक्षक निरंतर प्रयास करते हैं और विद्यार्थियों को सही दिशा प्रदान करते हैं तो उसके बेहतर परिणाम सामने आते हैं।

नशामुक्त भारत और हिमालय संरक्षण की दिलाई शपथ

समारोह के दौरान कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को नशामुक्त भारत अभियान की शपथ दिलाई। वहीं हिमालय बचाओ दिवस के अवसर पर नवनियुक्त कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने सभी को हिमालय के संरक्षण एवं संवर्धन की शपथ दिलाई।

उन्होंने पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने तथा हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण में सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया।

दोनों कुलपतियों का किया गया अभिनंदन

शिक्षक दिवस समारोह में विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों, छात्र नेताओं, कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कार्यकर्ताओं ने दोनों कुलपतियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया। विश्वविद्यालय परिवार की ओर से दोनों कुलपतियों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दी गईं और उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की अपेक्षा व्यक्त की गई।

इस दौरान दोनों कुलपतियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया तथा ग्वाल देवता का चित्र भेंट किया गया।

सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी किया सम्मानित

समारोह में विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षकों प्रो. के.बी. मेलकानी, प्रो. मंजू लता बिष्ट, प्रो. ए.बी. मेलकानी, प्रो. चित्रा पांडे तथा प्रो. नीता बोरा शर्मा को शॉल ओढ़ाकर एवं प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। उनके विश्वविद्यालय एवं शिक्षा जगत में योगदान को याद करते हुए सम्मान व्यक्त किया गया।

बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी रहे मौजूद

कार्यक्रम का संचालन प्रो. ललित तिवारी ने किया। अंत में कुलसचिव एवं संकायाध्यक्ष प्रो. रजनीश पांडे ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं आयोजन से जुड़े लोगों का आभार व्यक्त किया।

समारोह में प्रो. एच.सी.एस. बिष्ट, प्रो. अतुल जोशी, प्रो. रीना सिंह, प्रो. अमित जोशी, प्रो. एल.एस. लोधियाल, प्रो. एन.जी. साहू, प्रो. रीतश साह, प्रो. अर्चना नेगी साह, प्रो. चंद्रकला रावत, प्रो. ज्योति जोशी, प्रो. पी.के. गोस्वामी, प्रो. सावित्री कैरा, प्रो. संजय घिल्डियाल, प्रो. आर.सी. जोशी, प्रो. गीता तिवारी, प्रो. लता पांडे, डॉ. गगन होती, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. पेनी जोशी, प्रो. सुषमा टम्टा, प्रो. नीलू लोधियाल, डॉ. नंदन बिष्ट, एसएसजे विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. डी.एस. बिष्ट, परीक्षा नियंत्रक डॉ. पंकज साह, छात्र संघ अध्यक्ष करण सती, उप सचिव जयवर्धन सहित परिसर के शिक्षक, कर्मचारी, एनसीसी कैडेट्स, छात्र-छात्राएं, छात्र प्रतिनिधि एवं विश्वविद्यालय परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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