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 हल्द्वानी। विधायक सुमित हृदयेश ने केंद्र की भाजपा सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा कि मनरेगा गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि कानूनी रूप से सुनिश्चित रोजगार का अधिकार है, लेकिन केंद्र सरकार इसके मूल स्वरूप में बदलाव कर इस अधिकार पर प्रहार कर रही है।

सुमित हृदयेश ने कहा कि मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिन के रोजगार की गारंटी को व्यवहार में कमजोर किया जा रहा है।

बजट आवंटन में कटौती, मजदूरी भुगतान में देरी और काम की स्वीकृति में अनावश्यक शर्तें लगाकर गरीबों को रोजगार से वंचित किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ रही है और पलायन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा की आत्मा विकेंद्रीकरण और मांग आधारित रोजगार प्रणाली है, लेकिन अब इसे केंद्रीकृत नियंत्रण में लाकर राज्यों और पंचायतों की भूमिका को सीमित किया जा रहा है।

इससे ग्रामीण विकास प्रभावित हो रहा है और जरूरतमंद परिवारों को समय पर काम नहीं मिल पा रहा है।

सुमित हृदयेश ने मांग की कि मनरेगा को पूरी मजबूती के साथ लागू किया जाए, इसका बजट बढ़ाया जाए और मजदूरों को समय पर पूरा भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने मनरेगा के साथ हो रहे कथित अन्याय को नहीं रोका, तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक इस मुद्दे को पूरी ताकत से उठाएगी।

उन्होंने कहा कि गरीबों के हक की लड़ाई जारी रहेगी और मनरेगा को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

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