30 से अधिक जेसीबी और डंपरों से चला ध्वस्तीकरण अभियान, एक हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी और कर्मचारी रहे तैनात, चार घंटे तक गरजीं जेसीबी मशीनें।

रामनगर।  पूछड़ी क्षेत्र में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के अभियान के दूसरे चरण में प्रशासन और वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।

शनिवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में संयुक्त टीम ने 81 अवैध निर्माणों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया।

इस कार्रवाई में करीब 4 से 5 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराकर वन विभाग ने अपने कब्जे में लिया। अभियान के दौरान 30 से अधिक जेसीबी मशीनों, डंपरों और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 800 पुलिसकर्मियों के साथ विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों सहित एक हजार से अधिक लोग मौके पर तैनात रहे।

जानकारी के अनुसार शनिवार दोपहर करीब साढ़े चार बजे जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम भारी पुलिस बल के साथ पूछड़ी क्षेत्र पहुंची। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को शाम पांच बजे तक अपना सामान हटाने का समय दिया गया। इसके बाद शाम छह बजे से ध्वस्तीकरण अभियान शुरू कर दिया गया। मस्जिद मोहल्ला और मुल्ला पट्टी क्षेत्र में चिह्नित अवैध निर्माणों पर एक के बाद एक जेसीबी मशीनें गरजने लगीं। देखते ही देखते कई निर्माण जमींदोज कर दिए गए। करीब चार घंटे तक चले इस अभियान में कुल 81 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। रात दस बजे तक कार्रवाई पूरी होने के बाद मौके से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया।

कार्रवाई के बाद तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ पुनीत तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूछड़ी के अपर कोसी बीट में अतिक्रमण हटाने के अभियान के पहले चरण में 51 अवैध निर्माण हटाए गए थे। दूसरे चरण के लिए विभाग की ओर से कुल 83 निर्माणों की सूची तैयार की गई थी। जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने संबंधित दस्तावेजों का कई बार सत्यापन किया। इस दौरान न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त मामलों, वन अधिकार अधिनियम की प्रक्रिया के अंतर्गत आने वाले मामलों तथा जिन प्रकरणों में बेदखली की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, उन्हें कार्रवाई से अलग रखा गया। सभी दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम रूप से 81 निर्माणों को ध्वस्तीकरण के लिए चिह्नित किया गया।

डीएफओ पुनीत तोमर ने बताया कि भारतीय वन अधिनियम के प्रावधानों के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद नियमानुसार आदेश पारित किए गए और अपीलों पर सुनवाई के उपरांत कार्रवाई की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय में विचाराधीन मामलों और स्थगन आदेश वाले निर्माणों को अभियान से बाहर रखा गया।

इस बड़े अभियान को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए तराई पश्चिमी, तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, हल्द्वानी, रामनगर और कॉर्बेट क्षेत्र से वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बुलाया गया था। वहीं सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 800 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। अतिरिक्त पुलिस बल और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को मिलाकर मौके पर एक हजार से अधिक अधिकारी, जवान और कर्मचारी मौजूद रहे।

अभियान के दौरान 30 से अधिक जेसीबी मशीनों, डंपरों और अन्य भारी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। डीएफओ ने बताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई की गई है। इस अभियान में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, लोक निर्माण विभाग, पीआईयू जमरानी और नगर पालिका सहित कई विभागों का सहयोग रहा। उन्होंने दावा किया कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और इस दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई।

वहीं पूछड़ी क्षेत्र में लोगों को स्टांप पेपर पर जमीन बेचकर बसाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई के सवाल पर डीएफओ पुनीत तोमर ने कहा कि यह अलग विषय है। इस मामले में जिला स्तर पर कार्रवाई चल रही है और जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया गया है। उन्होंने कहा कि वन विभाग की प्राथमिकता वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराकर वापस विभाग के कब्जे में लेना है।

फिलहाल पूछड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के अभियान का दूसरा चरण पूरा हो चुका है। वन विभाग के अनुसार 81 अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर करीब 4 से 5 हेक्टेयर वन भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है। भारी पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारियों और दर्जनों मशीनों की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के बाद अब क्षेत्र में मलबा हटाने का काम जारी है।

इस कार्रवाई के साथ ही वन विभाग ने वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ अपना अभियान आगे भी जारी रखने के संकेत दिए हैं।

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