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हर वर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस इस बार “हमारी शक्ति, हमारा ग्रह” थीम के साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का संदेश दे रहा है।

इस दिन का उद्देश्य लोगों को जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

वैदिक परंपरा में भी पृथ्वी को माता के समान माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि वनस्पतियां पृथ्वी पर उगती हैं और समस्त जीवन का आधार बनती हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से पृथ्वी सौरमंडल का एकमात्र ज्ञात ग्रह है, जहां जीवन संभव है। इसकी सतह का लगभग 71 प्रतिशत भाग जल और 29 प्रतिशत भाग स्थल है। करीब 4.54 अरब वर्ष पुरानी पृथ्वी पर जीवन के लिए अनुकूल तापमान, ऑक्सीजन युक्त वायुमंडल और तरल जल मौजूद है।

पृथ्वी का वायुमंडल नाइट्रोजन और ऑक्सीजन से बना है, जो जीवों के लिए आवश्यक है, जबकि ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से रक्षा करती है। पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमते हुए 365.25 दिनों में सूर्य का एक चक्कर पूरा करती है।

पृथ्वी दिवस की शुरुआत 1970 में अमेरिका से हुई थी और आज यह 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि बढ़ते प्रदूषण, वनों की कटाई और संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से पृथ्वी संकट में है।

इस अवसर पर लोगों से प्लास्टिक का उपयोग कम करने, अधिक से अधिक पेड़ लगाने, जल और बिजली का संरक्षण करने तथा पुनर्चक्रण को अपनाने की अपील की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं।

पृथ्वी दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम अपने ग्रह को स्वच्छ, हरा-भरा और सुरक्षित बनाए रखने के लिए जिम्मेदारी से कार्य करें। “पृथ्वी को बचाओ, जीवन बचाओ” का संदेश आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है।

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