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शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत इस बार गरीब बच्चों के कोटे की सीटों पर दाखिले तीन मई से होंगे। ध्यान रखने वाली बात यह है कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं में दाखिले के लिए बच्चे की उम्र न्यूनतम तीन तो कक्षा एक में दाखिले के लिए उम्र छह साल होनी जरूरी है।

इससे नीचे वालों को दाखिला नहीं मिलेगा। समग्र शिक्षा उत्तराखंड की ओर से आरटीई प्रवेश के नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

आरटीई के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों की सबसे छोटी कक्षा में दाखिला मिलता है। यानी स्कूल प्री-प्राइमरी की कक्षा संचालित करता है तो उसके यहां सबसे छोटी कक्षा नर्सरी या एलकेजी कहलाएगी।

इसी तरह स्कूल यदि प्राइमरी कक्षाओं का संचालन करता है, तो वहां सबसे छोटी कक्षा एक मानी जाती है। इन कक्षाओं की 25 प्रतिशत सीटें हर साल आरटीई से भरी जाती हैं।

पिछले साल तक की व्यवस्था के अनुसार निजी स्कूलों में कक्षा एक में दाखिले की न्यूनतम उम्र पांच साल निर्धारित थी। जबकि, इससे निचली कक्षाओं में स्कूल मनमाने तरीके से कम उम्र वाले बच्चों को भी प्रवेश दे देते थे।

जिसके चलते शिक्षा मंत्रालय ने बीते साल सत्र की शुरुआत में ही पहली कक्षा में दाखिले की न्यूनतम उम्र छह साल कर दी थी। ऐसा करने से उन अभिभावकों को झटका लगा था, जिन्होंने अपने बच्चों को नर्सरी, एलकेजी कक्षा में दो से ढाई साल की उम्र में ही दाखिला दिला दिया था।

पूरे राज्यभर में ऐसे ही हजारों मामले सामने आने के बाद मंत्रालय का आदेश लागू नहीं हो सका था। इधर, हाल ही में मंत्रालय ने एक बार फिर पहली कक्षा में दाखिले को न्यूनतम उम्र छह साल करने का निर्देश दिया था।

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