सितंबर के प्रत्येक मंगलवार को किया प्रदर्शन, सात सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट में सौंपा ज्ञापन; समाधान नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
आशाओं का धरना-प्रदर्शन और सात सूत्रीय मांगें
नैनीताल। उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू से संबद्ध) ने ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन के आह्वान पर मंगलवार को तल्लीताल डांठ स्थित गांधी प्रतिमा के समीप धरना-प्रदर्शन किया।
इसके बाद आशा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजा।
आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि सितंबर माह की एक तारीख से प्रत्येक मंगलवार को प्रदेशभर में धरना-प्रदर्शन कर न्यूनतम वेतन, पेंशन, नियमितीकरण सहित अपनी लंबित मांगों को सरकार के समक्ष उठाया जा रहा है। मंगलवार 29 सितंबर को सितंबर माह के अंतिम मंगलवार को भी नैनीताल में आशाओं ने धरना देकर अपनी मांगों को दोहराया।
धरने के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों के प्रति उदासीन बनी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। यूनियन ने कहा कि 24 अक्टूबर 2026 को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 22 नवंबर 2026 को प्रदेशभर की आशाएं बड़ी संख्या में देहरादून पहुंचकर प्रदर्शन करेंगी। इसके बावजूद सरकार द्वारा मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई।
आशाओं ने रखीं सात प्रमुख मांगें
ज्ञापन के माध्यम से आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार के समक्ष सात सूत्रीय मांगें रखीं—
1. राज्य की आशाओं के लिए मासिक मानदेय निर्धारित किया जाए। डीजी हेल्थ उत्तराखंड द्वारा आशाओं का मानदेय 11,500 रुपये किए जाने संबंधी वर्ष 2021 के प्रस्ताव को लागू किया जाए। साथ ही खटीमा में किए गए वादे को तत्काल पूरा करने की मांग की गई।
2. आशाओं को न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। सेवानिवृत्ति के बाद सभी आशाओं को अनिवार्य आजीवन पेंशन देने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाए।
3. आशाओं को सेवानिवृत्ति के समय 10 लाख रुपये की एकमुश्त धनराशि देने की घोषणा की जाए।
4. नेशनल हेल्थ मिशन का बजट बढ़ाया जाए तथा इसमें एनजीओ की भूमिका समाप्त कर सभी कार्य स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से कराए जाएं।
5. मनमाने बहाने बनाकर आशा कार्यकर्ताओं की छंटनी करने की कोशिश बंद की जाए।
6. सभी सरकारी अस्पतालों के प्रभारियों को आशा कार्यकर्ताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं और इस संबंध में तत्काल आदेश जारी किया जाए।
7. राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए।
आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उनकी सेवाओं के अनुरूप मानदेय और सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकार से मांगों को गंभीरता से लेते हुए नवंबर से पहले समाधान करने का अनुरोध किया।
यूनियन ने कहा कि यदि नवंबर तक उनकी समस्याओं का गंभीरता से संज्ञान लेकर समाधान नहीं किया गया तो आशाएं प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होंगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
धरना-प्रदर्शन में प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल, नीलम बिष्ट, नीरू पुजारी, हेमा ठठोला, इंदु, हेमा पाठक, सुनीता, पूनम, हेमा, ममता, शांति, मनीषा, निर्मला चंद्रा, माधवी दर्मवाल, दीपा अधिकारी, कुसुमलता सनवाल, रश्मि राणा, राधा रानी, हेमा जोशी सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।





































