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नैनीताल। उत्तराखंड के विभिन्न ग्रामीण अंचलों में आज 14 अप्रैल 2026 को फूल देई का पारंपरिक त्योहार बिखौती (मेष संक्रांति) के अवसर पर हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

नन्हे-मुन्ने बच्चों ने घर-घर जाकर देहरी पर फूल अर्पित किए और समृद्धि व खुशहाली की कामना की।

यह लोक पर्व जहां चैत्र माह की शुरुआत में नववर्ष के स्वागत के रूप में मनाया जाता है, वहीं बिखौती के दिन इसे चैत्र माह की विदाई के प्रतीक के रूप में भी मनाया जाता है।

इस दौरान नई फसल को पहले लोक देवी-देवताओं को अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है और घरों में विशेष पकवान बनाए जाते हैं।

गणनाथ, पिनाकेश्वर, फल्दाकोट और दानपुर क्षेत्रों में पूजा-अर्चना के साथ पारंपरिक रीति-रिवाज निभाए गए। वहीं द्वाराहाट में प्रसिद्ध स्याल्दे बिखौती मेले का आयोजन हुआ, जिसमें ढोल-नगाड़ों और लोक वाद्यों की धुन पर झोड़ा नृत्य मुख्य आकर्षण रहा।

बिखौती पर्व पर कई स्थानों पर “बुढ़ कौतिक” का आयोजन कर बुजुर्गों का सम्मान किया गया, जबकि मायके पक्ष से बेटियों को भिटोली (उपहार) देने की परंपरा भी निभाई गई।

फूल देई की यह परंपरा आज भी जीवित है, जो उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और सामाजिक रिश्तों की मजबूती को दर्शाती है।

इस अवसर पर सभी क्षेत्रवासियों को बिखौती एवं फूल संक्रांति की शुभकामनाएं दी गईं।

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