केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मंत्रिपरिषद में बड़ा बदलाव कर सकते हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक किसी भी फेरबदल की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सूत्रों के अनुसार, इस बार युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों को अधिक प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया जा सकता है। माना जा रहा है कि कई नए युवा सांसदों को मंत्री बनाया जा सकता है, जबकि महिला मंत्रियों की संख्या बढ़ाकर सरकार महिला सशक्तिकरण का संदेश देने की कोशिश कर सकती है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए पिछड़ी जातियों से आने वाले सांसदों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है। बीजेपी इसे अपने सामाजिक और चुनावी समीकरण को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देख रही है।
राजनीतिक गलियारों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लेकर भी चर्चाएं हैं। सूत्रों का दावा है कि उनसे वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी लेकर शिक्षा मंत्रालय सौंपा जा सकता है। वहीं, मौजूदा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की नई भूमिका को लेकर भी अटकलें हैं। उन्हें किसी अन्य मंत्रालय या संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।
एनडीए के सहयोगी दलों को भी इस फेरबदल में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे गुट केंद्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश में है, जबकि बिहार से जुड़े राजनीतिक समीकरणों के बीच नीतीश कुमार को भी केंद्र सरकार में अहम जिम्मेदारी मिलने की चर्चाएं हैं।
इसके अलावा आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर एनडीए में आए नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को लेकर भी मंथन जारी होने की बात कही जा रही है। हालांकि इस मुद्दे पर पार्टी और आरएसएस के भीतर अलग-अलग राय होने की चर्चा है।
फिलहाल इन सभी संभावनाओं पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर पर होना है। सरकार की ओर से अभी तक मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।


