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नैनीताल। हाई कोर्ट ने हरिद्वार की परिवार अदालत के एक फैसले को रद करते हुए नवविवाहित जोड़े के तलाक को मंजूरी दे दी। यह जोड़ा शादी के 25 दिनों के भीतर ही अलग हो गया था।

कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं है। ऐसे में यह शादी एक बेजान मिलन से ज्यादा कुछ नहीं है। अगर दोनों पक्षों को तलाक नहीं दिया गया तो यह दोनों पक्षों के लिए क्रूरता होगी।

हरिद्वार के पुरुष और कानपुर की महिला की दो मई 2019 को शादी हुई थी। दोनों 27 मई को अलग हो गए। मध्यस्थता के माध्यम से मामले को सुलझाने के प्रयास विफल होने के बाद महिला ने दहेज निषेध अधिनियम में प्राथमिकी दर्ज कराई।

निर्णय से असंतुष्ट पति ने हाई कोर्ट में दी थी चुनौती

2021 में हरिद्वार की परिवार अदालत ने पति को अपनी पत्नी को 20 हजार रुपये का मासिक भरण-पोषण देने का निर्देश दिया, लेकिन तलाक की डिक्री नहीं दी। निर्णय से असंतुष्ट पति ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ऋतु बाहरी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने मामले के परीक्षण के बाद निष्कर्ष निकाला कि चूंकि दोनों पक्ष योग्य हैं, इसलिए यदि उन्हें इस रिश्ते से मुक्त नहीं किया गया तो यह क्रूरता होगी। उनके बीच सुलह की कोई गुंजाइश भी नहीं है।

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