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कैलाश मानसरोवर यात्रा हुई महंगी, अब प्रति श्रद्धालु खर्च होंगे 2.09 लाख रुपये

पिथौरागढ़ मार्ग से होकर गुजरने वाली पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए पहले से अधिक महंगी हो गई है। अब एक यात्री को इस यात्रा के लिए करीब 2.09 लाख रुपये खर्च करने होंगे, जबकि पिछले साल यह खर्च लगभग 1.74 लाख रुपये था। यानी इस बार यात्रा लागत में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

अधिकारियों के अनुसार, यात्रा खर्च बढ़ने की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की कीमत में आई तेजी है। यात्रा का एक बड़ा हिस्सा तिब्बत क्षेत्र में पड़ता है, जहां वीजा, मेडिकल जांच और अन्य शुल्क डॉलर में चुकाने होते हैं। डॉलर महंगा होने से इन खर्चों में सीधा असर पड़ा है। इसके अलावा भारतीय हिस्से में भी महंगाई और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के चलते शुल्क बढ़ाए गए हैं।

कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) भारतीय क्षेत्र में यात्रियों के रहने, खाने और गाइड जैसी सुविधाओं का प्रबंधन करता है। निगम ने इस बार अपने शुल्क में भी वृद्धि की है। अब भारतीय हिस्से में प्रति यात्री करीब 65 हजार रुपये खर्च होंगे, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 8 हजार रुपये अधिक हैं। अधिकारियों ने बताया कि नए शुल्क लागू कर दिए गए हैं और यात्रा के लिए पंजीकरण प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा 4 जुलाई से शुरू होगी। यात्रा के तहत कुल 10 जत्थे भेजे जाएंगे और प्रत्येक जत्थे में 50 श्रद्धालु शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह यात्रा बंद हो गई थी, जिसे वर्ष 1981 में फिर से शुरू किया गया। कोविड महामारी के दौरान भी यात्रा पर रोक लगी थी, लेकिन अब इसे दोबारा नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है।

हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि कैलाश पर्वत भगवान शिव का निवास स्थान है और यहां की यात्रा तथा परिक्रमा करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि बढ़ते खर्च के बावजूद हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस कठिन लेकिन आस्था से जुड़ी यात्रा पर निकलते हैं।

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