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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नगरपालिका चुनावों में देरी को लेकर न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली कथित टिप्पणियों के मामले में किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला को अवमानना नोटिस जारी किया है।

बुधवार को न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने यह नोटिस उधमसिंह नगर के जिलाधिकारी के माध्यम से जारी किया।

अदालत ने शुक्ला द्वारा कथित तौर पर प्रसारित एक वीडियो और पैंफलेट का संज्ञान लेते हुए कड़ी नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति थपलियाल ने टिप्पणी करते हुए कहा, “यह कानून की अदालत है, कोई फिल्म नहीं।” कार्यवाही के दौरान राजेश शुक्ला स्वयं भी अदालत में उपस्थित रहे।

पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की गरिमा को कम करने वाली टिप्पणियां किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकतीं। अदालत ने कहा कि मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा और सुनवाई साप्ताहिक आधार पर जारी रहेगी।

उच्च न्यायालय इस मामले में राजेश शुक्ला, सिरोली कला निवासी मोहम्मद यासीन तथा अन्य लोगों द्वारा दायर जनहित याचिकाओं समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। याचिकाकर्ताओं ने नगर निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जल्द चुनाव कराने की मांग की है।

सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए। आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि चुनाव कराने की तैयारी पूरी है, लेकिन कुछ प्रशासनिक कारणों से देरी हुई है। हालांकि अदालत ने आयोग के इस स्पष्टीकरण पर असंतोष जताया।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान में नगर पालिका का संचालन प्रशासक के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में जरूरी सार्वजनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

याचिका में यह भी कहा गया है कि सिरोली कला वर्ष 2018 से किच्छा नगर पालिका का हिस्सा है और पांच करोड़ रुपये के विकास कार्यों के बाद क्षेत्र को अलग करने के प्रस्ताव का स्थानीय निवासी विरोध कर रहे हैं।

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