अल्मोड़ा के क्वारब में सड़क बंद होने की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है. अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाइवे 109 पर क्वारब पुल के पास सुयाल नदी का तेज बहाव और लगातार भूस्खलन क्षेत्रवासियों के लिए खतरा बन चुका है।

सड़क बंद होने से न केवल वाहनों की आवाजाही बाधित हो रही है, बल्कि पैदल राहगीरों को भी जान जोखिम में डालकर चलना पड़ रहा है. स्थानीय लोग इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने क्वारब की भयावह स्थिति को उजागर किया. वीडियो में कुछ महिला टीचर्स टूटी सड़क के पास पहाड़ी रास्ते से गुजर रही थीं, तभी अचानक एक बड़ा पत्थर नीचे गिरा।

गनीमत रही कि पत्थर एक शिक्षिका के बगल से गुजरकर खाई में जा गिरा, और उनकी जान बाल-बाल बची. यह घटना क्षेत्र में भूस्खलन के खतरे को दर्शाती है. जेसीबी चालक, होमगार्ड और पुलिसकर्मी जान हथेली पर रखकर सड़क खोलने का काम कर रहे हैं. 150 मीटर की ऊंचाई से हो रहे भूस्खलन ने सुरक्षात्मक कार्यों को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

क्वारब के पास सड़क बंद होने से अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के लोग प्रभावित हैं. लोसगनी, नथूवाखान, चौंसली, करबला, लोधिया, लाट और देवली जैसे गांवों के निवासियों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है. बारिश में सड़क कीचड़ से भर जाती है, और धूप में धूल का गुबार उड़ता है, जिससे पैदल चलना मुश्किल हो जाता है।

स्थानीय निवासी पान सिंह (लोसगानी गांव) कहते हैं, ‘क्वारब पर लगातार हो रहे भूस्खलन से काफी दिक्कतें होती हैं. नजदीकी बाजार अल्मोड़ा पड़ता है. क्वारब बंद होने से गिरते बोल्डरों के बीच कीचड़ पर जान बचाकर भागना पड़ता है।’

बढ़ा किराया, पैदल सफर की मजबूरी

नथूवाखान और लोसगानी के लोग जरूरी सामान के लिए अल्मोड़ा पर निर्भर हैं. पहले नथूवाखान से क्वारब का किराया 60 रुपये था, जो अब बढ़कर 250 रुपये हो गया है. अल्मोड़ा के लिए 13 किमी की दूरी तय करने में 100 रुपये अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं।
वाहन न मिलने पर लोगों को पैदल चलना पड़ रहा है. प्रताप सिंह (नथूवाखान गांव) कहते हैं, ‘क्वारब के बंद होने से सभी लोग परेशान हो जाते हैं. पैदल आवाजाही के दौरान हमेशा अनहोनी का खतरा बना रहता है. एनएच को इसका स्थायी समाधान निकालने की जरूरत है।’

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