नैनीताल मे गरीबों के आशियानों पर प्राधिकरण का वार, कांग्रेस नेता शीलू कुमार ने डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन सरकार से की नियमितीकरण और मालिकाना हक की मांग।
कहा- दशकों से बसे परिवार अतिक्रमणकारी नहीं, जीवनभर की कमाई से बनाए आशियाने; नोटिस वापस नहीं हुए तो आंदोलन की चेतावनी
रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला
नैनीताल। जिला विकास प्राधिकरण द्वारा भवाली और नैनीताल क्षेत्र में गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के आवासीय भवनों को लेकर जारी किए जा रहे ध्वस्तीकरण नोटिसों के खिलाफ स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मामले को लेकर कांग्रेस नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता शीलू कुमार ने मोर्चा संभालते हुए जिला अधिकारी ललित मोहन रयाल के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर प्रभावित परिवारों को राहत देने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
ज्ञापन के माध्यम से शीलू कुमार ने प्रशासन के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि भवाली और आसपास के क्षेत्रों में रह रहे कई परिवारों को अतिक्रमणकारी बताकर कार्रवाई की जा रही है, जबकि इनमें से अधिकांश परिवार दशकों पहले यहां आकर बसे थे। इन परिवारों की तीसरी और चौथी पीढ़ी तक आज इन्हीं घरों में रह रही है। उन्होंने कहा कि लोगों ने अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई खर्च कर अपने लिए आशियाने बनाए हैं। ऐसे में बिना मानवीय और सामाजिक पहलुओं पर विचार किए उन्हें घरों से बेदखल करने की कार्रवाई उचित नहीं है।
शीलू कुमार का आरोप है कि मामला केवल ध्वस्तीकरण नोटिस जारी किए जाने तक सीमित नहीं है। प्रभावित परिवारों को बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में भी प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। इससे लोगों में मानसिक तनाव और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि वह किसी भी नए अवैध निर्माण या नियमों के उल्लंघन का समर्थन नहीं करते हैं। उनका संघर्ष उन परिवारों के लिए है जो वर्षों से इन क्षेत्रों में निवास कर रहे हैं और जिनका पूरा जीवन इन्हीं मकानों से जुड़ा हुआ है। सरकार को ऐसे मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई के बजाय मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए व्यावहारिक समाधान तलाशना चाहिए।
डिजिटल सर्वे और नियमितीकरण का सुझाव
कांग्रेस नेता ने सरकार के सामने समाधान का विकल्प रखते हुए कहा कि नजूल और पालिका भूमि का निष्पक्ष एवं पारदर्शी डिजिटल सर्वे कराया जा सकता है। इसके बाद वर्षों पुराने निर्माणों की स्थिति का परीक्षण कर निर्धारित नियमों के तहत उचित शुल्क लेकर उनका नियमितीकरण अथवा फ्रीहोल्ड किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से एक ओर जहां वर्षों से रह रहे परिवारों को स्थायी राहत और मालिकाना हक मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर सरकार को भी राजस्व प्राप्त होगा। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को लगातार ध्वस्तीकरण की आशंका, आर्थिक नुकसान और मानसिक उत्पीड़न से मुक्ति मिल सकेगी।
‘बस्तियां उजाड़ने की जरूरत नहीं’
शीलू कुमार ने कहा कि भवाली क्षेत्र में ऐसा कोई सरकारी प्रोजेक्ट प्रस्तावित नहीं है, जिसके लिए इन वर्षों पुराने आवासों को उजाड़ना आवश्यक हो। ऐसे में सरकार को पहले यह देखना चाहिए कि यदि इन परिवारों के मकानों से किसी सार्वजनिक परियोजना में बाधा नहीं आ रही है तो उन्हें उजाड़ने के बजाय नियमों के तहत राहत देने का रास्ता क्यों न अपनाया जाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला विकास प्राधिकरण द्वारा जारी ध्वस्तीकरण नोटिसों पर रोक लगाने, प्रभावित परिवारों की स्थिति की जांच कराने तथा पात्र परिवारों को मालिकाना हक देने की दिशा में ठोस निर्णय लेने की मांग की।
नोटिस वापस नहीं हुए तो आंदोलन की चेतावनी
शीलू कुमार ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही ध्वस्तीकरण नोटिसों पर रोक नहीं लगाई गई और प्रभावित परिवारों को राहत नहीं मिली तो क्षेत्र के हजारों नागरिक लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो लोग सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करेंगे और अपने घर, जमीन तथा अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार को उत्तराखंड की परिस्थितियों और यहां वर्षों से बसे लोगों की भावनाओं को समझना होगा।
गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को उजाड़ने के बजाय उन्हें नियमानुसार मालिकाना हक देने की दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए। यदि सरकार ने समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया तो आने वाले दिनों में आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है।

