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देहरादून। हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले में विजिलेंस ने पांच सदस्यीय जांच दल का गठन कर दिया है। इसकी कमान एसपी मुख्यालय रचिता जुयाल को सौंपी गई है। इस टीम में एक एक सीओ, दो निरीक्षक व एक सहायक शामिल हैं।

वहीं, निलंबित दो आइएएस व एक पीसीएस अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट तैयार हो रही है। जल्द ही यह आरोपितों को सौंप दी जाएगी।

हरिद्वार नगर निगम ने गत वर्ष सराय में 33 बीघा कृषि भूमि चयनित की थी। तब वहां भूमि का सर्किल रेट अधिक, जबकि बाजार भाव काफी कम था। इसके बाद चयनित भूमि का उपयोग बदलकर इसे कृषि से व्यावसायिक कर दिया गया। नतीजतन, सर्किल रेट में पांच गुना तक की बढ़ोतरी हो गई। इसी दर पर 54 करोड़ रुपये में तीन किसानों से यह भूमि खरीद ली गई।

इस पर सवाल उठने के बाद मामले की जांच कराई गई। प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर शासन ने जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त आइएएस वरुण चौधरी और एडीएम अजयवीर सिंह को निलंबित कर दिया था। मुख्यमंत्री ने पूरे प्रकरण की जांच विजिलेंस को सौंपने के भी निर्देश दिए थे। इस क्रम में विजिलेंस ने जांच दल का गठन कर दिया है।

जल्द ही यह जांच दल मौका मुआयना कर साक्ष्य एकत्र करेगा और आरोपियों के बयान भी दर्ज करेगा। वहीं, मामले में निलंबित अधिकारियों को अब चार्जशीट सौंपने की तैयारी है। इसके लिए शासन में प्राथमिक जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। यह देखा जा रहा है कि आरोपितों ने किन-किन नियमों का उल्लंघन किया है। इन सभी को आरोपपत्र में शामिल किया जाएगा।

आरोप पत्र जारी करने के बाद अधिकारियों से एक तय सीमा के भीतर इसका जवाब मांगा जाएगा। आरोपितों का जवाब मिलने के बाद शासन इसके लिए जांच अधिकारी नामित करेगा, जो उनके जवाबों के अध्ययन के बाद उनसे फिर पूछताछ करेगा। जांच पूरी होने के बाद इसे शासन को सौंपा जाएगा। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सचिव गृह व कार्मिक शैलेश बगौली ने कहा कि विजिलेंस जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं, वहीं निलंबित अधिकारियों को चार्जशीट देने की तैयारी चल रही है।

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